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तंदूर की आग में तप-तपकर गरीब मां-बाप ने पूरी कराई बच्चे की पढ़ाई, न्यायिक सेवा परीक्षा पास कर जज बना बेटा

तंदूर चलाने वाले माता-पिता का बेटा अजय सिंह अब जज बन गया है।

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तंदूर की आग में तप-तपकर गरीब मां-बाप ने पूरी कराई बच्चे की पढ़ाई, न्यायिक सेवा परीक्षा पास कर जज बना बेटा

नई दिल्ली। दुनिया के सभी माता-पिता यही चाहते हैं कि उनकी संतान पढ़-लिख कर कामयाब हो जाएं। अपने बच्चों को कामयाबी के शिखर तक पहुंचाने के लिए मां-बाप न जाने कितने दुख काट लेते हैं और अपना पूरा जीवन बच्चों की सफलता के लिए संघर्ष करते-करते ही ही खत्म कर देते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही मां-बाप के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने भट्टी की आग में तपकर अपने बच्चे की कामयाबी का रास्ता बनाते चले गए। आशा रानी और बलवीर सिंह अपने परिवार का गुज़ारा करने के लिए तंदूर चलाते हैं। तंदूर से होने वाली कमाई से घर चलाने के साथ-साथ बच्चे को शिक्षा दिलाना कितना मुश्किल हुआ होगा, ये तो आशा रानी और बलवीर सिंह ही जानते होंगे।

आपको जानकर खुशी होगी कि पंजाब के अबोहर की रहने वाली आशा रानी और बलवीर सिंह के बेटे अजय ने न्यायिक सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर न सिर्फ अपने माता-पिता का सम्मान बढ़ाया बल्कि इस बात को भी साबित कर दिया कि सफलता किसी भी हालात में पाई जा सकती है। तंदूर चलाने वाले माता-पिता का बेटा अजय सिंह अब जज बन गया है। आर्थिक कमज़ोरी की वजह से आशा रानी और बलवीर सिंह के परिवार में कोई भी दसवीं से ज़्यादा पढ़ाई नहीं कर सका। लेकिन आशा रानी चाहती थीं कि उनका बेटा पढ़-लिखकर बड़ा अधिकारी बने।

बेटे को काबिल बनाने के लिए आशा रानी अपने पति बलवीर सिंह के साथ मिलकर रात-दिन मेहनत की और बेटे की पढ़ाई के लिए सभी ज़रूरी सुविधाएं उपलब्ध कराया। अपनी कामयाबी पर खुद अजय काफी खुश हैं और वे इस कामयाबी का सारा श्रेय भी अपने माता-पिता को ही देना चाहते हैं। सफलता मिलने के बाद अजय ने बड़े ही भावुक होकर कहा कि उनकी मां ने तंदूर में तपकर रोटियां बनाती रहीं, ताकि मैं बड़ा आदमी बन जाऊं, और मैं बन गया। 9वीं कक्षा पास करने के बाद अजय सीनियर एडवोकेट उदेश कक्कड़ के दफ्तर में क्लर्क की नौकरी कर रहे थे, ताकि उनकी पढ़ाई चलती रहे।