
इस घटना ने बदल डाला था स्वामी विवेकानंद का नजरिया, इसे जानने के बाद सफलता चूमेगी आपके कदम
नई दिल्ली। स्वामी विवेकानंद की बातें, उनकी जिंदगी से जुड़ी कहानियां हमेशा से ही हमारे लिए काफी प्रेरणादायक रही है। अपनी जिंदगी की छोटी-छोटी घटनाओं से सीख लेकर उन्होंने जिंदगी के प्रति अपने नजरिया को बदला है। एक ऐसी ही छोटी सी घटना का जिक्र हम आपके सामने आज करने जा रहे हैं, जो शायद वर्तमान में आपकी भी कई सारी मुसीबतों को सुलझा दें।
एक बार स्वामी जी एक सरोवर के किनारे चले जा रहे थे। किसी विषय के बारे में वे गंभीर चिंतन कर रहे थे। उसी बीच सामने से बंदरों का झुंड उनकी तरफ बढ़ा। धीरे-धीरे जब वे बंदर बिल्कुल सामने आ गए तब उनका ध्यान टूटा।अपने सामने लाल मुंह के विशाल और विकराल बंदरों को देखकर वे एकदम से सहम गए।
स्वामी जी इस कदर घब्रा गए कि वे उनको देखकर पलटकर भागने लगे। उन्हें लगा कि अब इन बंदरों के चंगुलों से निकलकर खुद को बचाना नामुमकिन है। जैसे ही वे मुड़कर भागने लगे तभी किसी अनुभवी बुजुर्ग ने चिल्लाकर उनसे कहा कि,'वही रुक जाओ! भागो मत! पीछे पलटकर बंदरों के सामने सीधे खड़े हो जाओ! डरो मत! स्वामी जी वहीं रुक गए और बुजुर्ग की बात मानकर पलटकर बंदरों के सामने खड़े हो गए।
इसके बाद जो हुआ वह वाकई में चौंकाने वाला था। जैसे ही स्वामी जी सामने खड़े गए उसी वक्त सारे बंदर उन्हें देखकर रूक गए। उन्हें निडर खड़ा देख वे सारे बंदर वापस चले गए। इस घटना से स्वामी जी को बहुत बड़ी सीख मिली।
शिकागो धर्म सभा ने उन्होंने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि, 'उस दिन यदि उन विकराल बंदरों से डरकर मैं भागता तो शायद आज जिंदा नहीं रहता। वे सारे बंदर मुझे मार डालते, लेकिन जैसे ही सामने की ओर पलटकर मैं उनके सामने खड़ा हो गया, वे चुपचाप भाग गए। ठीक इसी प्रकार समस्याओं और संकटों से भागने के बजाय हमें उनका मुकाबला करना चाहिए। भागने से वे दूर नहीं होती बल्कि साहस के साथ मुकाबला करने से सारे संकट दूर हो जाते हैं।
स्वामी जी की जिंदगी से जुड़ी यह घटना वाकई में काफी प्रेरणादायक है जो हमें कठिन परिस्थितियों में निडर रहकर धैर्य के साथ उनका मुकाबला करने का सीख देती हैं।
Published on:
25 Nov 2018 01:29 pm
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