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सदियों से सूर्य और अग्नि को साक्षी मानकर यहां की औरतें सुबह-सुबह उठकर करती हैं ये काम

जहां गीत गाकर सोते को जगाने की है परंपरा

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Priya Singh

Jul 04, 2018

village where people sing song in early morning

सदियों से सूर्य और अग्नि को साक्षी मानकर यहां की औरतें सुबह-सुबह उठकर करती हैं ये काम

नई दिल्ली। दुनिया में मिथिला ही ऐसा क्षेत्र है जहां पर एक दूसरे को गीत गाकर सुबह में जगाने की परंपरा है। इसे पराती कहते हैं इस परंपरा को बचाने में पुरुषों की तुलना में महिलाओं का योगदान कहीं ज्यादा है। पराती का मतलब है सुबह की अगवानी में गया जाने वाला गीत। मिथिला के लोगों की दिनचर्या कुछ ऐसी है कि सूर्योदय से पहले अपने विस्तर छोड़ देते हैं और गीत संगीत की दैनिक क्रिया शुरू हो जाती है। मानों यहां हर घर अपने आप में गायन का केंद्र है गीत-संगीत व चित्रकला यहां के लोगों की सांसों में रच बस गया है। इसी तरह यह यहां की एक जीवन शैली बन गई है।

यहां निरक्षरों में गाने की कला के प्रति अतिशय अनुराग देखने को मिलता है। यद्यपि साक्षरता दर पिछले एक दशक की तुलना में काफी बढ़ी है। यहां की गायन परंपरा सही मायने में अद्भुत एवं देखने सुनने योग्य है, यह गीत-संगीत की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी से चलती आ रही है। इसे संरक्षित करने में बड़े बुजुर्गों का बहुत बड़ा हाथ है, लेकिन प्रवासी मैथिलों में यह परंपरा घट रही है। बच्चों के जन्म से लेकर व्यक्ति के मृत्यु र्पयत गीत गाने की अनोखी परंपरा है। जीवन के हर क्षण व उत्सव के लिए अलग-अलग सुर-ताल गीत एवं संगीत है। घर में मेहमान आने पर स्वागत गीत की परंपरा है और प्रस्थान के लिए विदाई गीत, भोजन व मेहमानवाजी के लिए अलग गीत है। बारह महीनों के लिए गीत माला बना हुआ है जिसे बारहमासा कहते है, बदलते रितु के हिसाब से गीत का प्रयोग होता है, वसंत में सुर लय ताल बदल जाते हैं।

यहां की जीवन शैली कुछ ऐसा है कि जिंदगी उत्सव मनाने जैसा है। भारत कृषि प्रधान देश है मिथिला एक ऐसा भूभाग है जहां पर कृषि वारिश पर आधारित है वारिश के लिए इंद्रदेव को गाना गाकर रिझाया जाता है जिस गीत को जटा-जटिन कहते हैं, प्रकृति पूजन के लिए अलग गीत है। सीता की धरती मिथिला की भाषा मैथिली है जो सीता का पर्याय भी है। इस भाषा को अंग्रेजी भाषाविद जार्ज ग्रियसर्न ने दुनिया की मधुरतम भाषा की संज्ञा दी थी, ग्रियर्सन भारत में भाषाई सर्वेक्षण पर बहुत बड़ा काम किया था मैथिली की मधुरता को बयां करते हुए उन्होंने लिखा था जब दो मैथिली महिलाएं किसी रंजिश वस आपस में झगड़ती हैं तो महसूस होता है कि वे गाना गा रही हैं। इस क्रिया में वे सूर्य व अग्नि को साक्षी बनाती हैं।