
Mood swings in pregnancy
Mood swings in pregnancy: प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग होना आम बात है, लेकिन इससे महिलाओं का काफी परेशानी होती है। गर्भावस्था के दौर में कई तरह के शारीरिक बदलाव होते हैं। यह बदलाव सकारात्मक हो सकते हैं और नकारात्मक भी। इन बदलावों की वजह से उनकी दिनचर्या भी प्रभावित होती है। गर्भावस्था में बार-बार मूड स्विंग की समस्या होती है तो उसके कारणों के बारे में जानना जरूरी है। ऐसे समय में परिवार के सदस्यों की भूमिका भी अहम होती है। जब गर्भवती महिला में इस तरह के मूड स्विंग नजर आएं तो उनके साथ सकारात्मक व्यवहार करें।
लक्षण व संकेत
बार-बार गुस्सा होना
एक बात पर जिद करना
व्यवहार का अटपटा होना
चिड़चिड़ापन महसूस होना
कभी-कभी लड़ाई करना
घबराहट महसूस करना
दिमाग में उलझन महसूस
परिजन समझें : इस स्थिति से बचाव में परिजन भावनात्मक भूमिका निभा सकते हैं।
ऐसे करें बचाव
अपनी दिनचर्या में बदलाव लाएं। हल्के एक्सरसाइज, योग-मेडिटेशन व वॉक करें। पर्याप्त नींद व हैल्दी डाइट लें। पार्टनर के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। धूम्रपान व एल्कोहल से दूर रहें। पसंद के काम करें जैसे किताबें पढ़ सकती हैं। दोस्तों से बातें करें। कोई हॉबी जिसमें शारीरिक अभ्यास न करना पड़े, वह काम करें। हल्के हाथों से बॉडी की मसाज भी करवा सकती हैं।
ये हैं प्रमुख वजह
प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग्स के कई कारण हो सकते हैं जैसे हार्मोनल बदलाव, एंग्जाइटी, नींद पूरी न हो पाना आदि। मूड स्विंग होने के लक्षण नजर आएं तो डॉक्टर से इस बारे में जरूर परामर्श लें, क्योंकि प्रेग्नेंसी में तनावमुक्त रहना जरूरी है।
हार्मोनल बदलाव : प्रेग्नेंसी में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रेरान हार्मोन की भूमिका भी होती है। इन हार्मोन के बढऩे से मूड स्विंग होना आम बात है। दरअसल, एस्ट्रोजन ब्रेन के उस हिस्से में एक्टिव होता है जो मूड को नियंत्रित करने का काम करता है।
थकान व नींद में कमी आना:
प्रेग्नेंसी में अक्सर महिलाओं को नींद में कमी होने की शिकायत हो जाती है या उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती। वे कितना भी सो लें, उन्हें थकान महसूस होती रहती है। यह उनके अंदर चिड़चिड़ापन पैदा करता है।
एंग्जायटी : यह अपने आप में एक बड़ी समस्या है। मां बनने और बच्चे की परवरिश को लेकर भी कई बार एंग्जायटी हो जाती है। लेबर पेन की वजह से भी चिंता हो सकती है। भविष्य की चिंताओं का असर भी मूड पर भी पड़ता है।
मेटाबॉलिज्म में बदलाव: प्रेग्नेंसी की शुरुआत के तीन माह में जिस तरह से शरीर में बदलाव होते हैं, इससे मेटाबॉलिज्म भी प्रभावित होता है। इस समय महिलाओं में मॉर्निंग सिकनेस अधिक होती है। यह भी मूड स्विंग होने का कारण है।
Updated on:
13 Aug 2023 06:33 pm
Published on:
13 Aug 2023 06:32 pm

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