
Success
अपने बिजनेस को सफलता दिलाने और खुद एक सफल एंटरप्रेन्योर बनने के लिए आपको कुछ खास तरीके अपनाने होंगे। एंटरप्रेन्योर के रूप में सफलता पाने के लिए खास तरीके अपनाएं।
एक सफल एंटरप्रेन्योर बनने और बिजनेस के क्षेत्र में कामयाबी हासिल करने के लिए आपको अपनी क्षमता को पहचानकर उसे निखारने पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही आपको हमेशा सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए। जो कुछ भी आप सीखें, उसे सिर्फ खुद तक सीमित न रखकर, अपने स्टाफ को भी सिखाएं। इससे आपका स्टाफ भी निपुणता हासिल करेगा और खुद सफलता हासिल कर आपकी भी सहायता करेगा। जानिए सफलता हासिल करने के कुछ खास तरीके -
सफलता की भूख जरूरी
जब तक आपके अंदर सफल होने की भूख या यूं कहें कि प्रबल इच्छा नहीं होगी, तब तक आप सफल नहीं हो सकते। सफलता हासिल करने के लिए आपको निडर होकर, पूरे निश्चय के साथ लक्ष्य की ओर बढऩा चाहिए। साथ ही बदलाव और सुधारों पर भी काम करना चाहिए। इसके बाद ही आप सफलता पा सकेंगे।
अहम है सही कम्यूनिकेशन
सफलता के लिए सही कम्यूनिकेशन होना बहुत जरूरी है। एक एंटरप्रेन्योर के रूप में आपको अपने स्टाफ और क्लाइंट्स के साथ अच्छे तरीके से कम्यूनिकेट करना चाहिए, तभी आप खुद को और अपने बिजनेस को सफलता की ओर बढ़ते हुए देख सकेंगे।
सलाह लेने से न हिचकें
एंटरप्रेन्योर होने का मतलब यह नहीं है कि आप अपने बिजनेस के बारे में सबकुछ जानते हैं। अगर सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो लक्ष्य प्राप्ति के दौरान किसी से सलाह लेने में कभी न हिचकें। भले ही यह सलाह आपका मेंटर दे या फिर कोई एम्प्लॉई।
इनोवेशन से बनेगा बड़ा ब्रांड
वडा पाव का नाम तो आपने सुना ही होगा, जब भी कोई महाराष्ट्र, खासकर मुंबई की सरजमीं पर कदम रखता है तो वडा पाव का स्वाद लेना नहीं भूलता। स्ट्रीट फूड में शामिल वडा पाव को लोग बड़े चाव से खाते हैं, यही वजह है कि वडा पाव ने एंटरप्रेन्योर धीरज गुप्ता की पहचान बना दी। धीरज ने ‘जंबोकिंग’ के जरिए वडा पाव को ब्रांड बना दिया। हालांकि यहां तक पहुंचने की उनकी यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आए। धीरज की फैमिली होटल और फूड बिजनेस में थी और उनकी मिठाई की दुकानें भी थी। १९९८ में सिम्बॉयसिस से होटल मैनेजमेंट में एमबीए करने के बाद धीरज ने स्वीट्स मैन्युफेक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का बिजनेस करने का फैसला किया, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हुए और उन्हें दुकान बंद करनी पड़ी।
जब वह स्वीट्स बिजनेस के लिए रिसर्च कर रहे थे तो उन्होंने बहुत सी इंटरेस्टिंग बातें सीखी। उन्होंने देखा कि किस तरह मैकडोनाल्ड्स, डोमिनोज, सबवे सफल फूड चैन बने। फिर उन्होंने स्ट्रीट फूड में हाथ आजमाने की सोची। मुम्बई के मलाड में चाट फैक्ट्री के नाम से दुकान खोली। जब उनकी दुकान पर ग्राहकों की संख्या बढऩे लगी तो उन्होंने ऑब्जर्व किया कि उनकी दुकान पर सबसे ज्यादा बिकने वाला आइटम वडा पाव है तो उन्होंने इस पर और अधिक काम करने का फैसला किया। इस प्रकार जंबोकिंग की यात्रा शुरू हुई। जंबोकिंग ने २००१ में पहला आउटलेट खोला। हालांकि उन्होंने सडक़ किनारे बिकने वाले वडा पाव से अधिक कीमत रखी। धीरे-धीरे उन्होंने एक्सपेरिमेंट करते हुए विभिन्न प्रकार के वडा पाव लॉन्च कर दिए। इससे बिक्री बढऩे लगी और कंपनी ग्रो करने लगी। आज कई मेट्रो सिटीज में धीरज की कंपनी के आउटलेट्स हैं। धीरज का मानना है कि सफलता उनको मिलती है, जो लंबे समय तक इस पर विश्वास करते हैं।’ उनकी खासियत यह रही कि उन्होंने लगातार इनोवेशन किए और बेहतर प्रजेंटेशन के साथ कस्टमर्स को प्रोडक्ट उपलब्ध करवाया।
Published on:
21 Oct 2017 04:26 pm
