
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेताया। (फोटो:X Handle/ @VividProwess)
Locked and loaded: दुनिया के सबसे ताकतवर नेता डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के प्रति अपना कड़ा रुख साफ कर दिया है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि वहां के सुरक्षा बलों (US Military Intervention Iran) ने अपने ही देश के प्रदर्शनकारी नागरिकों की हत्या करना बंद नहीं किया, तो उसे "बहुत भारी कीमत"चुकानी पड़ेगी। यह बयान तब आया है जब ईरान में आंतरिक असंतोष और विरोध प्रदर्शनों की लहर तेज हो रही है। ईरान में पिछले कुछ समय से सरकार विरोधी प्रदर्शन उग्र (Iran Protests 2026) होते जा रहे हैं। स्थानीय नागरिक आर्थिक बदहाली और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दुनिया के किसी भी कोने में मानवाधिकारों के हनन को बर्दाश्त नहीं करेगा। ट्रंप की यह चेतावनी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा संकेत है कि अमेरिका अब मूकदर्शक बन कर नहीं बैठेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया ईरान की हर गतिविधि पर नजर रख रही है। उन्होंने ईरान के नेतृत्व को आगाह किया कि बल प्रयोग की नीति उनके लिए आत्मघाती साबित हो सकती है। ट्रंप का यह बयान ईरान पर और अधिक आर्थिक और सैन्य दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
ट्रंप की "हिट वेरी हार्ड" (Hit Very Hard) वाली टिप्पणी को कूटनीतिक हलकों में केवल शब्दों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह हो सकता है कि अमेरिका आने वाले समय में ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगा सकता है या फिर सीमित सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं को भी खुला रख सकता है। ट्रंप की इस आक्रामक शैली ने मध्य पूर्व (Middle East) में एक बार फिर युद्ध की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।
ईरान पहले से ही भारी अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहा है। अब ट्रंप की यह ताजा चेतावनी ईरान की सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। यदि ईरान अपनी दमनकारी नीतियों में बदलाव नहीं करता, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह और भी अलग-थलग पड़ सकता है।
ट्रंप का यह बयान उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' और 'शांति के लिए शक्ति' की नीति को दर्शाता है। यह दिखाता है कि वे वैश्विक लोकतंत्र और मानवाधिकारों के मुद्दे पर एक सख्त प्रशासक की भूमिका निभाना चाहते हैं। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि इस तरह के कड़े बयानों से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है और तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है।
अब सबकी नजरें ईरान की प्रतिक्रिया पर टिकी हुूई हैं। क्या ईरान ट्रंप की इस चेतावनी के बाद अपने रुख में नरमी लाएगा? साथ ही, यूरोपीय संघ और रूस जैसे अन्य वैश्विक खिलाड़ी इस विवाद में क्या भूमिका निभाते हैं, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा। आने वाले दिनों में अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
बहरहाल, इस विवाद का एक पहलू यह भी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर ट्रंप घरेलू स्तर पर अपनी छवि एक मजबूत नेता के रूप में पेश करना चाहते हैं। ईरान को दी गई यह चेतावनी उनकी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है, ताकि वे अपने समर्थकों को यह संदेश दे सकें कि वे दुनिया में अमेरिका का दबदबा बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
Published on:
05 Jan 2026 04:01 pm
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