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अब चिट्ठी से नहीं मिलेंगे संदेश, 400 साल पुरानी डाक सेवा बंद, लोगों ने लाल डिब्बों को मुंहमांगी कीमतों पर खरीदा

डेनमार्क ने अपनी 400 साल से ज्यादा पुरानी चिट्ठी डिलीवरी सेवा को पूरी तरह बंद कर दिया है। इस मौके पर लोगों ने लाल डिब्बों को मुंह मांगी कीमत पर खरीदा।

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डाक सेवा बंद (फोटो- IANS)

दुनिया के सबसे डिजिटल देशों में शामिल डेनमार्क ने अपनी 400 साल से ज्यादा पुरानी चिट्ठी डिलीवरी सेवा को पूरी तरह बंद कर दिया है। वर्ष 1624 से चली आ रही यह सेवा अब इतिहास बन चुकी है। सरकारी डाक कंपनी पोस्टनॉर्ड ने आखिरी चिट्ठियां पहुंचाने के बाद घोषणा की है कि वह अब पत्र नहीं, केवल पार्सल डिलीवरी करेगी।

पोस्टनॉर्ड के प्रमुख किम पीडरसन के मुताबिक, यह एक पुराने अध्याय का अंत है। लोगों के संवाद का तरीका बदल चुका है और अब ईमेल, डिजिटल मेलबॉक्स व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मुख्य माध्यम बन गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बीते 25 वर्षों में डेनमार्क में भेजे जाने वाले पत्रों की संख्या में 90 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। इससे कंपनी घाटे में आ गई।

सड़कों पर नहीं दिखेंगे रेड मेलबॉक्स

डेनमार्क की सड़कों पर पहचान बन चुके लाल मेलबॉक्स भी अब हटाए जा रहे हैं। जून से अब तक करीब 1500 मेलबॉक्स हटाए गए और दिसंबर में इन्हें चैरिटी के लिए बेच दिया गया। इनकी कीमत 1500 से 2000 डेनिश क्रोनर तय थी, लेकिन लोगों ने इन्हें भावुकता में मुंहमांगी कीमतों पर खरीदा।

यहां भी रोज–रोज नहीं आती चिट्ठी…
नीदरलैंड: हफ्ते में कुछ दिन ही डिलीवरी, कई रूट बंद।
नॉर्वे: नियमित पत्र सेवा लगभग खत्म।
फिनलैंड: सप्ताह में 1–2 दिन चिट्ठी।
स्वीडन: पत्र सेवा सिमटी, पार्सल पर जोर।
जर्मनी: कई इलाकों में डिलीवरी कम।
ब्रिटेन: हफ्ते में 3 दिन की योजना।
जापान: ग्रामीण इलाकों में सीमित सेवा।
ऑस्ट्रेलिया: पत्र घटे, पार्सल मुख्य कारोबार।