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Aden: विदेश में बसा भारत का वो शहर, जिसके बारे में कोई नहीं जानता

Aden City: 1937 में, अदन को ब्रिटिश भारत से अलग करके एक क्राउन कॉलोनी बना दिया गया।

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Aden City: भारत से 3,708 किलोमीटर दुर समुन्द्र पार एक शहर है, जो कभी भारत का हिस्सा हुआ करता था। एक पोर्ट सिटी, जो भारत के लिए व्यापार और रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था, पर अब किसी और देश का हिस्सा है। यह शहर आदेन नाम से जाना जाता है। आदेन, जो हमेशा से ही भारतीय समुद्री इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, यह प्राचीन काल से ही एक बड़े व्यापारिक और सामरिक बंदरगाह के रुप में मशहूर रहा है। यह विशेष रूप से अपने तेल और मसाला व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। इसके साथ ही, आदेन भारतीय राजनीतिक व्यवस्था के एक अभिन्न हिस्से के रूप में माना जाता था। स्वतंत्रता के बाद, इसका भाग्य बदल गया और यह नगर अब यमन में स्थित है। आदेन आरब सागर के मुख्य मार्ग के पास स्थित है और इसलिए यह व्यापारी गतिविधियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा है। इसकी खास भौगोलिक स्थिति ने इसे रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है, जिसने भारतीय इतिहास में इसके महत्व को बढ़ावा दिया।

आदेन का इतिहास

आदेन का इतिहास उसके रणनीतिक स्थल के रूप में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस शहर का ऐतिहासिक विकास हजारों सालों से उसके व्यापारिक महत्व के कारण बहुत प्राचीन है। आदेन यमन के दक्षिणी तट पर स्थित होने के कारण, यह समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र बना रहा है।

विशेष रूप से, आदेन में तेल, मसाला, और अन्य सामग्री का व्यापार हमेशा से प्रमुख रहा है। इसके साथ ही, यमनी सम्राटों ने इसे अपनी राजधानी के रूप में भी बनाया था, जिससे इसका राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व भी बढ़ा। ब्रिटिश शासन के दौरान, आदेन को भारत के एक प्रांत का हिस्सा बनाया गया था। यहां ब्रिटिश शासन के अंतिम दशकों तक ब्रिटिश व्यापारिक और सामरिक प्रभाव बना रहा, जिससे यहां के अर्थव्यवस्था और भौतिक संरचना में सुधार हुआ। 1937 में, अदन को ब्रिटिश भारत से अलग करके एक क्राउन कॉलोनी बना दिया गया, यह दर्जा उसने 1963 तक बरकरार रखा। इसमें बंदरगाह शहर अदन और उसके आसपास के क्षेत्र (192 किमी2 [74 वर्ग मील] का क्षेत्र) शामिल थे।

भारत से जुड़ाव

भारतीय व्यापारिक समुदाय ने विशेष रूप से आदेन के तेल उत्पादन और निर्यात में बड़ा योगदान दिया। यहां के तेल खनन उद्योग ने भारतीय व्यापारिक संबंधों को मजबूती दी, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को भी लाभ हुआ। इस दौरान, भारतीय नागरिकों ने भी आदेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह यहां के व्यापार, शिक्षा, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रिय रहे और समुद्री बंदरगाह के माध्यम से भारत और आदेन के बीच व्यापार और आर्थिक आधार पर संबंध बढ़ाए। इस तरह, आदेन भारतीय व्यापारिक सम्बन्धों में एक महत्वपूर्ण कड़ी का रूप बना रहा और इसने भारत के और यमन के बीच एक अत्यधिक महत्वपूर्ण संबंध का निर्माण किया।

आदेन का विभाजन

1967 में, आदेन ने अपनी स्वतंत्रता प्राप्त की और यमन का हिस्सा बन गया। इसके बाद से, यहां का प्रशासन यमन सरकार द्वारा किया जाता है। आदेन को उदार और संविदानी राज्य के रूप में जाना जाता है, जहां समुद्री और व्यापारिक गतिविधियां महत्वपूर्ण हैं।

आदेन का प्रशासन यमन सरकार द्वारा संचालित होता है, जिसने शहर के विकास और उनकी सुरक्षा को महत्व दिया है। यमन सरकार ने आदेन को एक समृद्ध और उदार नगर बनाने के लिए कई प्रयास किए हैं। शहर में विभिन्न समुद्री और व्यापारिक गतिविधियां होती हैं, जो यमन के अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

आदेन की वर्तमान स्थिति

आदेन आज भी यमन के महत्वपूर्ण नगरों में से एक है और यहां समुद्री व्यापार, उद्योग, और व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। यहां के लोगों का आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन भी बहुत महत्वपूर्ण है। आदेन में समुद्री व्यापार की बड़ी गतिविधियां होती हैं, जिसमें मुख्यतः तेल और गैस के निर्यात का कारोबार शामिल है। यहां के उद्योगों में संगठित तरीके से उत्पादन की जाने वाली वस्त्र, मिश्रित धातु, और खाद्य उत्पादों की विनिर्माण होती है।