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कनाडा से अलग होने का प्रस्ताव अल्बर्टा में खारिज, पीएम कार्नी बोले- लोगों ने कनाडा को चुना

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अल्बर्टा प्रांत के कनाडा से अलग होने के प्रस्ताव को शुरुआती जनमत संग्रह परिणामों में खारिज किए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अल्बर्टा के लोगों ने राष्ट्रीय एकता और कनाडा के साथ साझा भविष्य को चुना है।
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भारत

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kamlesh sharma

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Oct 20, 2026

Mark Carney

Canadian Prime Minister Mark Carney (File Photo/X/@MarkJCarney)

ओटावा। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अल्बर्टा प्रांत के कनाडा से अलग होने के प्रस्ताव को शुरुआती जनमत संग्रह परिणामों में खारिज किए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अल्बर्टा के लोगों ने राष्ट्रीय एकता और कनाडा के साथ साझा भविष्य को चुना है। कार्नी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 19 अक्टूबर को अल्बर्टा के लोगों ने स्पष्ट फैसला किया। उन्होंने एकता, मिलकर आगे बढ़ने और एक-दूसरे का ख्याल रखने का रास्ता चुना। सबसे बढ़कर, अल्बर्टा के लोगों ने कनाडा को चुना।

अलगाव के प्रस्ताव पर जश्न का माहौल

सीबीसी न्यूज के मुताबिक, शुरुआती नतीजों के अनुसार, 76 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अलगाव पर बाध्यकारी जनमत संग्रह कराने के प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया, जबकि करीब 23 प्रतिशत लोगों ने इसके समर्थन में वोट दिया। प्रस्ताव के खारिज होने का अनुमान सामने आने के बाद 'फॉरएवर कैनेडियन' कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों ने खुशी मनाई। सीबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, समर्थकों ने नारे लगाए, मुट्ठियां उठाईं और झंडे लहराकर फैसले का जश्न मनाया। कार्नी ने कहा कि जनमत संग्रह के अन्य सवालों पर मतगणना जारी है, लेकिन अलगाव के मुद्दे पर आए परिणाम से अल्बर्टा और कनाडा के बाकी हिस्से नए संकल्प के साथ मिलकर आगे बढ़ सकेंगे।

अल्बर्टा को ऊर्जा क्षेत्र में अहम भूमिका देने की तैयारी

कनाडा के प्रधानमंत्री ने देश के आर्थिक विकास को लेकर अपनी सरकार की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार दुनिया भर में नए व्यापारिक साझेदार बनाने, बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स को गति देने और कनाडा की ऊर्जा क्षमता का विस्तार करने पर काम कर रही है।

कार्नी ने कहा कि इस रणनीति में अल्बर्टा की भूमिका केंद्रीय होगी। उन्होंने जोर दिया कि कनाडा अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर वैश्विक ऊर्जा महाशक्ति के रूप में आगे बढ़ना चाहता है। उन्होंने कहा कि कनाडा की ताकत उसके सभी हिस्सों के योगदान से बनती है और अब देश के सामने साझा उपलब्धियों के आधार पर भविष्य को और बेहतर बनाने का अवसर है।

आव्रजन और सरकारी अधिकारों पर भी मांगी गई राय

जनमत संग्रह में अलगाव के सवाल के अलावा नौ अन्य मुद्दों पर भी मतदाताओं की राय मांगी गई थी। सीबीसी न्यूज के अनुसार, शुरुआती नतीजों में आव्रजन नियंत्रण, नए प्रवासियों के लिए सामाजिक सेवाओं और प्रांतीय व संघीय सरकारों के अधिकारों से जुड़े कई प्रस्तावों को समर्थन मिलता दिखा। हालांकि, इन सवालों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, 57 प्रतिशत मतदाताओं ने आव्रजन नियंत्रण से जुड़े प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि 55 प्रतिशत ने नए प्रवासियों के लिए सामाजिक सेवाओं से संबंधित सवाल के पक्ष में मतदान किया। सामाजिक सेवाओं का लाभ लेने से पहले नए प्रवासियों के लिए प्रतीक्षा अवधि तय करने के प्रस्ताव को 57.3 प्रतिशत समर्थन मिला।

इसके अलावा, 54.3 प्रतिशत मतदाताओं ने अस्थायी निवासियों से स्वास्थ्य सेवाओं का भुगतान कराने के प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं, मतदान के लिए नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य करने के पक्ष में 58.9 प्रतिशत वोट पड़े।

न्यायाधीशों की नियुक्ति और सीनेट खत्म करने पर भी सवाल

संवैधानिक मुद्दों से जुड़े सवालों पर शुरुआती नतीजों में 52.9 प्रतिशत मतदाताओं ने प्रांतों को न्यायाधीश नियुक्त करने का अधिकार देने के प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं, कनाडा की सीनेट को समाप्त करने के प्रस्ताव को 51 प्रतिशत समर्थन मिला।

एक अन्य प्रस्ताव के तहत अल्बर्टा को कुछ संघीय कार्यक्रमों से बाहर रहने के बावजूद उनसे जुड़ी धनराशि प्राप्त करने का विकल्प देने की बात थी। इस प्रस्ताव को 54.4 प्रतिशत समर्थन मिला।

हालांकि, प्रांतीय या साझा संवैधानिक अधिकार क्षेत्र के मामलों में संघीय कानूनों से टकराव होने पर अल्बर्टा के कानूनों को प्राथमिकता देने के प्रस्ताव को शुरुआती नतीजों में केवल 47.4 प्रतिशत समर्थन मिला।

सोमवार को हुए इस जनमत संग्रह में अल्बर्टा के लोगों से प्रांत के कनाडा का हिस्सा बने रहने और अलगाव की प्रक्रिया शुरू करने के लिए बाध्यकारी मतदान कराने के प्रस्ताव सहित कई राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर राय मांगी गई थी। शुरुआती परिणामों ने कनाडा से अलग होने के प्रस्ताव के प्रति स्पष्ट असहमति का संकेत दिया है।