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4-6 मई को आसमान में दिखेगी ये अनोखी खगोलीय घटना, अंधेरी रात में रोशनी से जगमगाएगा आकाश

4 से 6 मई को होने वाली इस खगोलीय घटना को सीधे आंखों से भी देखा जा सकेगा। आसमान में ‘एटा एक्वेरिड्स’ का अनूठा नजारा दिखाई देगा। ये घटना 4 मई से होना शुरू हो जाएगी। 4 से 6 मई के बीच एक के बाद तारे टूटेंगे, जिससे आसमान में एक अनोखी आतिशबाज़ी दिखाई देगी। खास बात ये है कि इस दौरान उल्काओं की रफ्तार 7,57,344 किमी प्रति घंटा होगी।
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नई दिल्ली

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Jyoti Sharma

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Updated: 2 May 2024, 10:29 AM IST

4-6 मई को आसमान में दिखेगी अनोखी खगोलीय घटना

4-6 मई को आसमान में दिखेगी अनोखी खगोलीय घटना

इस हफ्ते आसमान में एक के बाद एक टूटते तारों की आतिशबाजी होने वाली है। यों तो हर साल 19 अप्रैल से 28 मई के बीच उल्काओं की बारिश होती है लेकिन इस बार के उल्कापात जैसा अनूठा नजारा दो दशक बाद देखने को मिलेगा। अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने बुधवार को बताया कि उल्काओं की बारिश शुरू हो चुकी है। 4 से 6 मई के बीच यह पीक पर होगी यानी अपने चरम पर होगी।

सीधे आंखों से देखी जा सकती है ये घटना

नासा (NASA) के वैज्ञानिकों के मुताबिक यह उल्कापात हैली धूमकेतु से जुड़ा है। इसे ‘एटा एक्वेरिड्स’ कहा जाता है। आसमान में चार से छह मई के बीच हर मिनट एक उल्कापात नजर आएगा। उल्काओं की रफ्तार करीब 7,57,344 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। आतिशबाजी इतनी चमकीली होगी कि इसे सीधे आंखों से देखा जा सकेगा। एटा एक्वेरिड्स का अगला विस्फोट 2046 में होगा। इस उल्कापात में जो उल्काएं (टूटते तारे) दिखाई देती हैं, वे हैली धूमकेतु से सैकड़ों साल पहले अलग हो गई थीं। इस धूमकेतु की कक्षा पृथ्वी के इतने करीब से नहीं गुजरती कि पृथ्वी पर उल्कापात हो सके।

सबसे साफ नजर आएगा दक्षिणी गोलार्ध में 

अमेरिकन मीटियोर सोसायटी का कहना है एटा एक्वेरिड्स उल्कापात का पीक टाइम पांच मई को रात 8:43 बजे होगा। इसे पांच और छह मई को सुबह होने से कुछ घंटों पहले देखा जा सकता है। इसे देखने के लिए बायनॉकुलर्स और टेलीस्कोप का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। नासा के मुताबिक उल्कापात दक्षिणी गोलार्ध में सबसे साफ नजर आएगा। भूमध्य रेखा के उत्तर में भी यह देखा जा सकता है।

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