
बांग्लादेश में उग्र भीड़ की हिंसा का शिकार हिंदू युवक खोकन दास अस्पताल में। (फोटो: स्क्रीन शॉट)
Bangladesh Violence: बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षा (Minority Rights Bangladesh) का संकट गहराता जा रहा है। अब एक और ऐसी घटना सामने आई है जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। एक हिंदू व्यक्ति को न केवल उग्र भीड़ के गुस्से का शिकार (Bangladesh Hindu Attack) होना पड़ा, बल्कि उसे जिंदा जलाने की भी कोशिश की गई। इस घटना ने एक बार फिर वहां की कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों की रक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना बांग्लादेश के एक व्यस्त इलाके में हुई है, जहां अचानक ही कट्टरपंथी तत्वों ने एक हिंदू व्यक्ति (Mob Violence Dhaka) को घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब भीड़ ने बिना किसी ठोस कारण या छोटी सी अफवाह के आधार पर उस व्यक्ति पर हमला कर दिया। लात-घूंसों और लाठियों से बेरहमी से पीटने के बाद भी जब हमलावरों का मन नहीं भरा, तो उन्होंने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने व्यक्ति पर पेट्रोल जैसा ज्वलनशील पदार्थ छिड़का और उसे आग(Hindu Man Set On Fire) लगा दी।
शरियतपुर जिले के भोजेश्वर इलाके में 31 दिसंबर बुधवार रात 10 से 11 बजे के बीच यह दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ 50 वर्षीय हिंदू दवा विक्रेता खोकन दास को भीड़ ने अपनी बर्बरता का निशाना बनाया। हमलावरों ने पहले उस पर कुल्हाड़ियों व हथियारों से प्रहार किया और फिर निर्दयता की सारी हदें पार करते हुए पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी। इस जानलेवा हमले में यह व्यक्ति बुरी तरह झुलस गया। आसपास मौजूद कुछ लोगों और बाद में पहुंची पुलिस की मदद से उसे गंभीर हालत में स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सा अधिकारियों के मुताबिक, पीड़ित का शरीर बहुत हद तक जल चुका है और उसकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। उसे फिलहाल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। यह खबर फैलते ही स्थानीय हिंदू परिवारों में डर का माहौल है।
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा (Violence) की घटनाएं बढ़ गई हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि वहां का प्रशासन कट्टरपंथियों पर नकेल कसने में पूरी तरह विफल रहा है। मंदिरों को निशाना बनाना, व्यापारिक प्रतिष्ठानों को लूटना और अब खुलेआम जिंदा जलाने की कोशिश जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि वहां न्याय का शासन कमजोर पड़ चुका है।
स्थानीय प्रशासन ने हालांकि जांच करवाने का आश्वासन दिया है, लेकिन अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में हो रही देरी ने लोगों का गुस्सा और बढ़ा दिया है। भारत सहित कई अन्य देशों ने बांग्लादेश सरकार से अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी बांग्लादेश में हो रहे इन मानवाधिकार उल्लंघनों की निंदा की जा रही है, परंतु धरातल पर स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है।
इस खौफनाक वारदात के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिन्हें देख कर दुनिया भर के नेटिजन्स आक्रोशित हैं। लोग बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि क्या वहां कानून केवल बहुसंख्यकों के लिए है? मानवाधिकार समूहों ने मांग की है कि इस घटना के दोषियों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से सख्त से सख्त सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
बहरहाल,किसी भी सभ्य समाज में भीड़ द्वारा हिंसा करने की मानसिकता को स्वीकार नहीं किया जा सकता। बांग्लादेश में एक धर्म विशेष के लोगों को चुन-चुन कर निशाना बनाना न केवल लोकतंत्र की हत्या है, बल्कि यह एक बड़े मानवीय संकट की ओर इशारा करता है। समय आ गया है कि विश्व शक्तियां इस मामले में दखल दें और यह सुनिश्चित करें कि बांग्लादेश में रहने वाला हर नागरिक, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, निडर होकर अपना जीवन जी सके।
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Updated on:
01 Jan 2026 06:24 pm
Published on:
01 Jan 2026 06:07 pm
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