
बांग्लादेश में हिंसा। (फोटो- IANS)
Bangladesh violence: बांग्लादेश में आवामी लीग की सरकार गिरने के बाद हिंसा की स्थिति जारी है। उस्मान हादी के मौत के बाद तो हालात और बदतर हो गए हैं। दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल नाम के दो युवकों की ढाका में लिंचिंग कर दी गई। बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदू गहरे सदमे में हैं और डर के माहौल में जी रहे हैं। वह भारत को लगातार SOS भेज रहे हैं।
बांग्लादेशी हिंदुओं ने कहा कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ उन्हें मारने पर उतारू है। सड़कों पर रोज ताने सुनने को मिल रहा है। इस्लामी भीड़ के गुस्से से बचने के लिए उन्होंने सीमाएं खोलने की अपील की है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान के वतन वापसी से उनमें डर का माहौल और भी अधिक पैदा हो गया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया से सोशल मीडिया के जरिए बातचीत करने वाले अल्पसंख्यक हिंदुओं ने कहा कि हमें अपने धर्म के लिए लगातार अपमान झेलना पड़ता है, लेकिन हम बार-बार होने वाले अपमान पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकते। सड़क पर चलते समय हमें जो मामूली ताने सुनने पड़ते हैं, वे जल्द ही भीड़ द्वारा हत्याओं में बदल सकते हैं। हम फंसे हुए हैं और हमारे पास जाने के लिए कोई जगह नहीं है। हम अपमान सहते हैं, क्योंकि हमें डर है कि हमारा भी वही हाल हो सकता है जो दीपू या अमृत का हुआ।
बांग्लादेशी हिंदुओं ने कहा कि अगर चुनाव के बाद बांग्लादेशी नेशनलिस्ट पार्टी सत्ता में आती है तो हमारे लिए बहुत बुरा होगा। BNP हिंदू विरोधी पार्टी है। उन्होंने कहा कि हम बेबस हैं। हम सिर्फ भारत भाग सकते हैं, लेकिन सीमाओं पर कड़ी निगरानी है।
ढाका के एक और हिंदू निवासी ने कहा कि अगर दीपू दास की लिंचिंग ने डर पैदा किया है, तो पूर्व राष्ट्रपति खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी ने उन्हें और चिंतित कर दिया है। अगर BNP सत्ता में आती है, तो हमें और उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है। शेख हसीना की अवामी लीग ही हमारी एकमात्र रक्षक थी।
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, चंद्रपुर और छत्तीसगढ़ के पाखनजूर में बांग्लादेशी हिंदुओं की शरणार्थी बस्तियों में रहने वाले लोगों ने कहा कि वहां अत्याचार हो रहा है, लेकिन हिंदू संगठन एक्टिव क्यों नहीं हो रहे हैं? भारत ही एकमात्र ऐसा देश है। जहां बांग्लादेश के हिंदू संकट के समय भरोसा कर सकते हैं। और भी हिंदुओं को मारा जाएगा, लेकिन सीमाएं बंद रहेंगी। हम बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं।
एक अन्य युवक ने कहा कि बांग्लादेश में 2.5 करोड़ हिंदू हैं। यह कोई छोटी संख्या नहीं है। भारत में हिंदू संगठन सिर्फ दिखावा कर रहे हैं। हम एक बड़े नरसंहार का सामना कर रहे हैं। मैमनसिंह के एक निवासी ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सीमाएं खुलने के बाद हिंदुओं का पलायन होगा, लेकिन कम से कम हम हिंसा से सुरक्षित रहेंगे।
ढाका के एक हिंदू ने कहा, "हम सबसे बुरे सपने जी रहे हैं। भारतीय सीमाएं खुलने से कम से कम उन लोगों के लिए भागने का रास्ता बन जाएगा जो उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं।" बांग्लादेश में कई लोग दिहाड़ी मज़दूरी करके गुज़ारा करते हैं, जिनमें दीपू चंद्र दास के परिवार जैसे लोग भी शामिल हैं।
Published on:
27 Dec 2025 07:23 am
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