
अमेरिकी बिजनेसमैन जेफ बेजोस की अंतरिक्ष कंपनी ब्लू ओरिजिन ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक अहम प्रगति का दावा किया है। कंपनी ने ऐसी तकनीक विकसित करने में सफलता हासिल की है, जिससे चांद की मिट्टी (लूनर रेगोलिथ) से ऑक्सीजन निकाली जा सकती है। यह उपलब्धि भविष्य में चांद पर लंबे समय तक मानव उपस्थिति की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसके परिणाम बेहद उत्साहजनक बताए जा रहे हैं।
ब्लू ओरिजिन द्वारा विकसित यह प्रक्रिया मोल्टन रेगोलिथ इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक पर आधारित है। इस विधि में चांद की धूल और पत्थरों को अत्यधिक उच्च तापमान पर गर्म करके पिघलाया जाता है। इसके बाद इसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, जिससे खनिजों में मौजूद ऑक्सीजन को बांधने वाले रासायनिक बंध टूट जाते हैं। परिणामस्वरूप ऑक्सीजन गैस अलग होकर संग्रहित की जा सकती है। यह तकनीक भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार चांद की मिट्टी में लगभग 40 से 45 प्रतिशत तक ऑक्सीजन विभिन्न खनिजों जैसे सिलिका, आयरन ऑक्साइड और एल्युमिनियम ऑक्साइड के रूप में मौजूद होती है। यदि इस ऑक्सीजन को सफलतापूर्वक निकाला जाए, तो पृथ्वी से ऑक्सीजन ले जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो सकती है। इससे अंतरिक्ष अभियानों की लागत भी घटेगी और मिशन अधिक लंबे समय तक चल सकेंगे।
इस प्रक्रिया को चांद पर लागू करना आसान नहीं है। रेगोलिथ को लगभग 1600 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान तक गर्म करना पड़ता है, जिसके लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। चांद पर निरंतर ऊर्जा आपूर्ति एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए सोलर एनर्जी और उन्नत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों पर भी शोध किया जा रहा है।
इस तकनीक का एक और बड़ा लाभ यह है कि ऑक्सीजन निकालने के बाद बचे हुए पदार्थ जैसे लोहा, एल्युमिनियम और सिलिकॉन का उपयोग निर्माण कार्यों में किया जा सकता है। भविष्य में इन्हीं संसाधनों से चांद पर आवास बनाए जा सकते हैं, उपकरण तैयार किए जा सकते हैं और सोलर पैनल जैसी संरचनाएं विकसित की जा सकती हैं। यह मानव सभ्यता को पृथ्वी से बाहर बसने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करेगा।
Published on:
14 Apr 2026 02:46 pm
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