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NRI Special : सेरोगेसी कानून में बदलाव से एनआरआई की उम्मीदें जागीं, जानिए

भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने सेरोगेसी कानून में बडा बदलाव किया है। संतान की चाहत रखने वाले युगल के लिए यह बहुत अहम है।

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भारत सरकार ने यह तय किया है कि सरोगेसी प्रक्रिया में युग्मक (Gametes) बच्चा चाहने वाले दंपत्ति का ही होना जरूरी नहीं है। ध्यान रहे कि हिंदुस्तान की नरेंद्र मोदी ( Narendra modi) सरकार की ओर से सेरोगेसी कानून में बदलाव होने से निसंतान एनआरआई युगल की उम्मीदों को पंख लग गए हैं। कई एनआरआई (latest nri news in hindi) चाहते हैं कि वे भी माता पिता बनें। भारतीय समाज के बजाय पश्चिम में इस विषय में राय जुदा है।

इससे पहले पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने एक अविवाहिता महिला की सरोगेसी के जरिए मां बनने वाली याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि यह भारतीय समाज के खिलाफ है। ऐसा पश्चिमी देशों में ही मुमकिन है।

एनआरआई को सरोगेसी का विकल्प चुनने की अनुमति
चर्चा का विषय यह है कि क्या भारत में सरोगेसी के लिए इच्छुक माता-पिता की राष्ट्रीयता पर कोई प्रतिबंध है? सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021, केवल भारतीय नागरिकों और एनआरआई को भारत में सरोगेसी का विकल्प चुनने की अनुमति देता है। एनआरआई और ओसीआई को छोड़ कर विदेशी नागरिकों को भारत में सरोगेसी व्यवस्था में शामिल होने की अनुमति नहीं है।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार सरकार ने सरोगेसी (विनियमन) नियम, 2022 में संशोधन किया , तब डोनर गेमाइट्स यानी अंडाणु या शुक्राणु का उपयोग करने की अनुमति दे दी गई । उसमें यह शर्त शामिल रही कि लाइफ पार्टनरों में से कोई एक मेडिकल कंडीशन के आधार पर अपने गेमाइट्स का उपयोग करने में असमर्थ हो।