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‘चांद की मिट्टी’ में उगी चने की फसल, भविष्य में खुद फसल उगा सकेंगे अंतरिक्ष यात्री

वैज्ञानिकों ने 'चांद की मिट्टी' के साथ ऐसा प्रयोग किया है जो भविष्य में काफी उपयोगी साबित हो सकता है। क्या है यह प्रयोग? आइए नज़र डालते हैं।

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भारत

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Tanay Mishra

Mar 12, 2026

Chickpea crop in lunar soil

Chickpea crop in lunar soil (Photo - UT Institute for Geophysics)

अब वो दिन दूर नहीं जब अंतरिक्ष यात्री चांद पर ही उगी हुई फसल से बना खाना खा सकेंगे। टैक्सास की एक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 'चांद की मिट्टी' में चने की फसल उगाने में कामयाबी पाई है। यह प्रयोग नासा के अपोलो मिशन द्वारा चांद से लाई गई असली मिट्टी के नमूने के आधार पर बनाई गई धूल पर किया गया है। वैज्ञानिकों ने पाया कि चांद की मिट्टी के मिश्रण में चने के पौधे 75% तक अच्छी तरह पनप सकते हैं। हालांकि जैसे-जैसे मिट्टी में चांद की धूल की मात्रा बढ़ाई गई तो चने की संख्या में थोड़ी कमी देखी गई, लेकिन उनका आकार सामान्य ही रहा। चने में भरपूर प्रोटीन होता है, इसलिए इसे भविष्य के मिशन के लिए सबसे अच्छा विकल्प माना जा रहा है।

कैसे बनाई उपजाऊ मिट्टी?

चांद की मिट्टी काफी पथरीली और कांच जैसी नुकीली होती है। इसमें खेती करना लगभग नामुमकिन होता है। उपजाऊ बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने इसमें विशेष प्रकार की फंगस और केंचुओं से बनी खाद मिलाई। इस तकनीक से मिट्टी में जान आ गई और चने के बीज अंकुरित होने लगे।

उगाए गए चनों की हो रही जांच

वैज्ञानिकों का कहना है कि 'चांद की मिट्टी' में उगाए चनों को अभी खाया नहीं जा सकता, क्योंकि इनमें एल्युमीनियम और आयरन जैसी धातुओं की मात्रा की जांच की जा रही है। चांद की मिट्टी में धातुएं ज़्यादा होती हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकती हैं। सुरक्षा जांच के बाद ही इन्हें खाया जा सकता है।

चांद पर खेती क्यों होगी अहम?

भविष्य में अमेरिका और चीन चांद पर इंसानी बस्तियाँ बसाने की योजना बना रहे हैं। धरती से चांद तक खाना पहुंचाना बहुत महंगा पड़ता है। अगर वहाँ पौधे उगने लगेंगे, तो यात्रियों को ताज़ा भोजन तो मिलेगा ही, साथ ही पौधों से मिलने वाली ऑक्सीज़न भी प्राप्त होगी।