
दक्षिण प्रशांत में चीन के मिसाइल परीक्षण से बढ़ी हलचल। (इमेज सोर्स: आईएएनएस)
South Pacific Nuclear Free Zone China Missile Test: चीन के लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण ने एक बार फिर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने न्यूक्लियर पावर वाली सबमरीन से डमी वॉरहेड वाली लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण दक्षिण प्रशांत महासागर में किया है। हालांकि, चीन ने इसे सैन्य अभ्यास का हिस्सा बताया। लेकिन ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और ताइवान समेत कई देशों ने इस पर गंभीर चिंता जताई है।
यूरोपियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के परीक्षण के बाद दलाई लामा के भतीजे खेदरूब थोंडुप ने कहा कि चीन का यह परीक्षण केवल सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि एक स्पष्ट भू-राजनीतिक संदेश है। उनके अनुसार, जिस दिन ऑस्ट्रेलिया और फिजी ने रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, उसी दिन दक्षिण प्रशांत परमाणु-मुक्त क्षेत्र में मिसाइल परीक्षण कर चीन ने अपने रणनीतिक इरादों का संकेत दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मिसाइल JL-3 थी, जो अमेरिका तक मार करने में सक्षम है। इससे टेस्टिंग से चीन अपनी ताकत दिखाना चाहता है।
रिपोर्ट के अनुसार, मिसाइल उस क्षेत्र में गिरी जिसे 1986 की रारोटोंगा संधि (Treaty of Rarotonga) के तहत दक्षिण प्रशांत परमाणु-मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया था। यानी कि यहां कोई भी देश न्यूक्लियर फ्री जोन में परीक्षण नहीं कर सकता है। चीन ने 1987 में इस संधि से जुड़े प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए थे। फिर भी उसने टेस्टिंग किया।
जापान ने चीन से इस तरह की गतिविधियों पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए गंभीर चिंता जताई है। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने इसे क्षेत्र की स्थिरता के लिए अस्थिर करने वाला कदम बताया, जबकि न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने कहा कि चीन की यह कार्रवाई बेहद चिंताजनक है।
ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय की प्रवक्ता करेन कुओ ने आरोप लगाया कि चीन लगातार सैन्य गतिविधियां बढ़ाकर क्षेत्रीय तनाव बढ़ा रहा है और अब इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण के जरिए बाकी के देशों को डराने की कोशिश कर रहा है। ताइवान ने चीन से संयम बरतने और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का सम्मान करने की अपील की है।
Updated on:
12 Jul 2026 06:07 pm
Published on:
12 Jul 2026 06:07 pm
