
सीनेटर लिंडसे ग्राहम
Senator Lindsey Graham Statement Tariffs on India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले सीनेटर लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया है। वे अपने विवादित बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहे। उन्होंने रूस से तेल खरीदने वाले देशों, जिनमें भारत भी शामिल है... उन पर 500% तक टैरिफ लगाने की मांग का समर्थन किया था। इसके अलावा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पर भी उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर वह राष्ट्रपति होते तो लोगों की जान लेने वाले नेताओं को मार देते।
जनवरी में लिंडसे ग्राहम ने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिस पर वह कई महीनों से काम कर रहे थे। ग्राहम ने कहा था कि विधेयक के तहत अमेरिका के राष्ट्रपति को भारत सहित उन देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता था, जो रूस से तेल खरीदते हैं।
ग्राहम ने कहा था कि यह विधेयक ट्रंप को रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई करने की ताकत देगा। उनका कहना था कि ऐसे देश पुतिन के युद्ध प्रयासों को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत ने रूस से तेल की खरीद में काफी कमी की है। साथ ही उन्होंने कहा कि ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ इस बात का अच्छा उदाहरण हैं।
ग्राहम ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को आधुनिक दौर का हिटलर, धार्मिक नाजी और बहुत बुरा इंसान बताया था। उन्होंने कहा कि अब उनके जाने का समय आ गया है। लोग भी चाहते हैं कि वह जाएं। इसके बाद उन्होंने कहा, 'अगर मैं आपकी जगह राष्ट्रपति होता, तो उन नेताओं को मार देता जो लोगों की जान ले रहे हैं। इसे अब खत्म करना होगा।'
जर्मनी के म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान ग्राहम ने ग्रीनलैंड को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। जब उनसे पूछा कि यूरोप के उनके दोस्त इस विवाद को लेकर चिंतित हैं, तो उन्होंने कहा कि अगर आप चिंतित हैं, तो एक बीयर पीजिए और डॉक्टर से मिल आइए। इसके बाद उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड हमारे एजेंडे में है, लेकिन हमारा मकसद नतीजे हासिल करना है। ग्रीनलैंड का मालिक कौन है, इससे किसे फर्क पड़ता है, मुझे तो नहीं।
ग्राहम ने अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने पाकिस्तान से इजरायल को कूटनीतिक मान्यता देने की भी अपील की। उनका यह बयान इसलिए भी विवादों में आया क्योंकि उस समय राष्ट्रपति ट्रंप सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान की मध्यस्थता का समर्थन कर चुके थे।
Updated on:
12 Jul 2026 05:58 pm
Published on:
12 Jul 2026 05:35 pm
