11 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जिस चीनी कैमरे पर अमेरिका ने लगाई पाबंदी, वह जर्मनी में दिखा तो मचा बवाल, अचानक दुनिया में क्यों बढ़ी हलचल?

जर्मनी के हेस्से राज्य संसद में अप्रैल की शुरुआत में सांसद ओलिवर स्टिरबॉक ने सवाल उठाया कि सरकारी दफ्तरों में चीन की हिकविजन और दाहुआ कंपनियों के कैमरे क्यों लगे हैं। ये वही कंपनियाँ हैं जिन पर अमेरिका ने उइगर मुसलमानों की निगरानी के लिए प्रतिबंध लगा रखा है।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Mukul Kumar

Apr 11, 2026

ITMS-cameras

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (फोटो- AI)

जर्मनी की हेस्से राज्य संसद में अप्रैल की शुरुआत के दौरान एक सवाल उठा जिसने चीन की निगरानी तकनीक पर नई बहस छेड़ दी। सांसद ओलिवर स्टिरबॉक ने पूछा कि स्थानीय सरकारी दफ्तरों में हिकविजन और दाहुआ कंपनियों के कैमरे क्यों लगे हैं।

ये वही चीनी कंपनियां हैं जिन पर अमेरिका पहले ही पाबंदी लगा चुका है क्योंकि इनके कैमरे चीन में उइगर मुसलमानों की निगरानी में इस्तेमाल होते हैं।

सवाल यह था कि जो तकनीक इंसानी अधिकारों का गला घोंटने के लिए बनी, वो यूरोप के एक लोकतांत्रिक देश की सरकारी इमारतों में कैसे पहुंच गई।

36 साल पहले क्या हुआ था जो आज भी नहीं भुलाया जा सका

5 अप्रैल को बारेन विद्रोह की 36वीं सालगिरह थी। 1990 में चीन के अक्तो जिले में करीब 200 उइगरों ने जबरन परिवार नियोजन और जबरन गर्भपात की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।

चीन ने इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हजारों सैनिकों से कुचल दिया। बड़े पैमाने पर लोग मारे गए। और आज 36 साल बाद भी इस घटना की कोई स्वतंत्र जांच नहीं हुई। इस साल म्यूनिख और बर्लिन में लोग सड़कों पर उतरे। उन्होंने मारे गए लोगों को याद किया और इंसाफ की मांग की।

चीन का डिजिटल जाल अब दुनिया भर में फैल रहा है

वर्ल्ड उइगर कांग्रेस की कार्यकारी समिति की अध्यक्ष रूशन अब्बास ने ग्वाटेमाला में एक अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा सम्मेलन में चेतावनी दी कि चीन की निगरानी प्रणाली अब सिर्फ शिनजियांग तक सीमित नहीं है।

उन्होंने कहा कि चीन एक ऐसा डिजिटल तानाशाही का मॉडल तैयार कर रहा है जो धीरे-धीरे दूसरे देशों में भी फैल रहा है। जो देश सस्ती चीनी तकनीक अपनाते हैं वो अनजाने में इसी निगरानी तंत्र का हिस्सा बन जाते हैं।

चीन ने अब अपनी सप्लाई चेन को और मजबूत किया

इस सबके बीच चीन ने 31 मार्च से एक नई 18 सूत्री नीति लागू की है जो उसकी औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखला को और ज्यादा सरकारी नियंत्रण में लाती है।

इस नीति के तहत अगर कोई विदेशी कंपनी या देश चीन की आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा माना जाए तो चीन उस पर पाबंदी, जुर्माना और निर्यात नियंत्रण लगा सकता है।

सीधे शब्दों में कहें तो चीन एक तरफ दुनिया में अपने कैमरे फैला रहा है और दूसरी तरफ अपनी तकनीक और व्यापार पर ऐसा शिकंजा कस रहा है जो किसी को भी आसानी से चुनौती देने नहीं देगा।

यह सिर्फ उइगरों की लड़ाई नहीं रही

जब जर्मनी की एक राज्य संसद में सवाल उठता है, जब ग्वाटेमाला के छात्र इस तकनीक के खतरे समझते हैं और जब म्यूनिख की सड़कों पर लोग 36 साल पुराने जुल्म को याद करते हैं तो यह साफ हो जाता है कि चीन के खिलाफ आवाज अब किसी एक कोने तक सीमित नहीं है।