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चीन की अमरीका को चेतावनी – युद्ध से होगा दोनों पक्षों को नुकसान, पहले जानें इतिहास फिर करें बात

दक्षिण चीन समुद्र के अधिकतर हिस्सों पर चीन अपना दावा करता है जबकि पड़ोसी देश ताईवान, मलेशिया, वियतनाम, फिलीपींस और ब्रुनई इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर अपना दावा कर रहे हैं।

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जालौन

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Punit Kumar

Feb 08, 2017

south china sea

south china sea

चीन ने अमेरिका को चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि उसे दक्षिण चीन समुद्र के विवादित द्वीपों के बारे में इतिहास की अपनी जानकारी को दोहरा लेना चाहिए क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हुए समझौतों में चीन को यह अधिकार दिया गया था कि जापान ने जिन क्षेत्रों पर कब्जा किया था उन पर चीन का अधिपत्य होगा।

गौरतलब है कि इन विवादित द्वीपों पर नए अमरीकी प्रशासन की टिप्पणियों से चीन बहुत ही आहत है। अमेरिका के विदेश मंत्री रैक्स टिलरसन ने संसद में हाल ही में कहा था कि चीन का उन द्वीपों पर कोई अधिकार नहीं होना चाहिए। इसके अलावा व्हाइट हाऊस ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जलीय क्षेत्रों की रक्षा करने का संकल्प भी व्यक्त किया है।

पिछले हफ्ते अमरीका के रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने सुझाव दिया था कि दक्षिण चीन समुद्र के मामले में कूटनीतिक विषयों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग यी ने ऑस्ट्रलिया की राजधानी कैनबरा में कल कहा कि मेरी अमरीका के दोस्तों को सलाह है कि द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास के बारे में अपनी जानकारी को दोहरा लें।

साथ ही कहा कि 1943 के काहिरा घोषणा पत्र और 1945 के पोटर्सडेम समझौते में साफ कहा गया है कि जापान ने जिन चीनी क्षेत्रों पर कब्जा किया था वे उसे चीन को लौटाने होंगे। इसमें नांनसा द्वीप भी शमिल हैं। इसके अलावा वांग ने कहा कि 1946 में तत्कालीन चीनी सरकार ने अमरीका की मदद से कानूनी प्रावधानों के मुताबिक नानसा द्वीपों को जापान से वापिस लिया था तथा वे चीन के संप्रभु क्षेत्र थे।

इसके कुछ समय बाद चीन के कुछ पड़ोसी देशों ने नानसा द्वीपों और रीफ क्षेत्रों पर अवैध तरीके से कब्जा कर लिया और इसी की वजह से यह तथाकथित दक्षिणी चीन समुद्र विवाद पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप चीन संबद्ध पक्षों के साथ सीधे तौर पर बातचीत के लिये प्रतिबद्ध है ताकि इस विषय का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकाला जा सके और चीन के रूख में कोई बदलाव नहीं होगा।

गौरतलब है कि दक्षिण चीन समुद्र के अधिकतर हिस्सों पर चीन अपना दावा करता है जबकि पड़ोसी देश ताईवान, मलेशिया, वियतनाम, फिलीपींस और ब्रुनई इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर अपना दावा कर रहे हैं जो न केवल सामरिक नजरिए से बल्कि प्रचुर मत्स्य संपदा, तेल एवं गैस भंडारों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

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