
मई 2024 के लिए वैश्विक औसत तापमान रीडिंग 60.6°F (15.91°C) थी
धरती के बढ़ते तापमान (Global Warming) से कई तरह की जलवायु चुनौतियां (Climate Change) पैदा हो गई हैं। अमरीकी वैज्ञानिकों ने अब पृथ्वी को और गर्म होने से रोकने की नई तरकीब खोजी है, जिसमें पृथ्वी के वातावरण को सुखाया जाएगा।
क्योंकि जल वाष्प यानी गैसीय रूप में पानी एक प्राकृतिक ग्रीनहाउस गैस है, जो गर्मी को पार नहीं होने देता। यह ठीक उसी तरह काम करता है, जैसे कोयला, तेल या गैस के जलने पर निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस। इसलिए नासा और नेशनल ओशियानिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के वातावरण में मौजूद वाष्पकणों को सुखाने की योजना बनाई है।
साइंस एडवांस जर्नल में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक वैज्ञानिक वातावरण्या के उस हिस्से में बर्फ छोडऩा चाहते हैं, ताकि वह हिस्सा ठंडा हो जाए, इससे इंसान जनित गतिविधियों के कारण निकलने वाली गर्मी को सोखने में मदद मिलेगी।
कुछ वैज्ञानिक इसे खारिज करते हैं
वैज्ञानिक कहते हैं कि पृथ्वी का तापमान इतना बढ़ चुका है कि उसे कम कर पाना अब असंभव सा हो गया है। ऐसे में ऊपरी वातावरण को सुखाने की थ्योरी भी ऐसे ही अंतिम प्रयासों की कड़ी है। हालांकि जियोइंजीनियरिंग के अन्य तरीके पहले भी पेश किए गए, लेकिन उनसे जुड़े खतरों के कारण खारिज कर दिए गए। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि जियोइंजीनियरिंग कार्बन प्रदूषण को कम करने का विकल्प नहीं हो सकता।
क्या है यह थ्योरी
शोधकर्ता जोशुआ श्वात्र्ज कहते हैं, यह ऐसा आइडिया नहीं है, जिसे हम लागू नहीं कर सकते। इस थ्योरी के मुताबिक अत्याधुनिक विमान धरती से 17 किलोमीटर की ऊंचाई यानी स्ट्रेटोस्फीयर के ठीक नीचे बर्फ के कणों को हवा में छोड़े। इस ऊंचाई पर हवा धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठती है। वहां से बर्फ और ठंडी हवा ऊपर उठकर वहां तक जाएगी, जहां वाष्पकण हैं। इससे वाष्पकण बर्फ में बदल जाएंगे और स्ट्रेटोस्फीयर का तापमान कम हो जाएगा। शोध का निष्कर्ष है कि हर हफ्ते दो टन बर्फ हवा में छोड़ी जाए। ऐसा करने से पांच फीसदी तक तापमान कम हो सकता है। वह कहते हैं कि तापमान में ज्यादा कमी नहीं होगी, लेकिन प्रदूषण में कमी आएगी।
खतरों को भी समझना होगा
विक्टोरिया यूनिवर्सिटी में जलवायु वैज्ञानिक एंड्रृयू वीवर कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन की समस्या को हल करने के लिए वातावरण से छेड़छाड़ करना नई समस्याओं को बुलाना है। वह कहते हैं, जियोइंजीनियरिंग की थ्योरी ठीक है, लेकिन पूरा मामला बच्चों की कहानी जैसा है। यह आइडिया कार्बन उत्सर्जन से निपटने तक ही ठीक है।
Published on:
02 Mar 2024 09:03 am
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