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ट्रंप के एक फैसले से ग्लोबल मार्केट में यू-टर्न: ईरान पर हमला टला, कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट

Crude Oil Prices: डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमले टालने के फैसले से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और ग्लोबल मार्केट में तेजी लौटी है।

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भारत

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Rahul Yadav

Mar 23, 2026

Crude Oil Prices

Crude Oil Prices Drop

Crude Oil Prices: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमले को टालने के फैसले के बाद ग्लोबल मार्केट में अचानक सुधार देखने को मिला है। इस घोषणा के साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और शेयर बाजारों में तेजी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच भरोसा लौटता नजर आ रहा है।

हमले टालने की घोषणा और कूटनीतिक संकेत

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर जानकारी दी कि अमेरिका ईरान के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले पांच दिनों के लिए रोक देगा। उन्होंने तेहरान के साथ चल रही बातचीत को ''सकारात्मक और सार्थक'' बताया और संकेत दिया कि लंबे समय से जारी तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की संभावना बन रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला जारी संघर्ष के बीच पहली बार उच्च-स्तरीय बातचीत की पुष्टि करता है।

बाजारों में तेजी, तेल कीमतों में गिरावट

ट्रंप की घोषणा के बाद बाजारों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में करीब 2 प्रतिशत तक उछाल देखा गया, जिससे पहले की गिरावट की भरपाई हो गई। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 100 डॉलर के नीचे आ गई, जो बाजार के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। यूरोपीय बाजारों में भी शुरुआती गिरावट के बाद तेजी आई, जबकि क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी सकारात्मक रुख देखा गया है।

होर्मुज स्ट्रेट और ऊर्जा आपूर्ति

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम होर्मुज स्ट्रेट के जरिए ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने में मदद कर सकता है। यह मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है, और यहां किसी भी तरह का तनाव कीमतों को सीधे प्रभावित करता है।

अनिश्चितता अभी भी बरकरार

हालांकि, हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। ईरान से जुड़े कुछ मीडिया संस्थानों ने ट्रंप के फैसले को पीछे हटना बताया है, वहीं कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इस घोषणा से पहले कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई थी। ऐसे में बाजारों में सुधार के बावजूद निवेशक सतर्क बने हुए हैं।

पहले से दिख रहा था असर

इस संघर्ष का असर पहले ही वैश्विक ऊर्जा ढांचे पर पड़ चुका है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी मिसाइल हमलों में कतर के एक बड़े गैस-टू-लिक्विड्स प्लांट को नुकसान पहुंचा, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है। वहीं, रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका में डीजल की कीमतों में पिछले एक महीने में 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे सप्लाई चेन और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है।

भारत के लिए राहत की खबर

तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत लेकर आई है। दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल भारत कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति बेहद संवेदनशील है। कम कीमतों से महंगाई पर दबाव कम हो सकता है और सरकार के वित्तीय बोझ में भी राहत मिल सकती है।

खाड़ी क्षेत्र पर बनी नजर

हालांकि, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। वहां बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं, और किसी भी तरह की अस्थिरता उनके रोजगार और भारत आने वाले रेमिटेंस पर असर डाल सकती है। ऐसे में भारत सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।