31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रूस में राष्ट्रपति चुनाव पर दुनिया की नज़रें

रूस में आज होने वाले राष्ट्रपति चुनाव पर दुनिया भर की नज़रें टिकी हुई हैं | रूस सहित पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण होंगे ये चुनाव |

3 min read
Google source verification

image

Navyavesh Navrahi

Mar 18, 2018

Russian Election

लंदन से मधु चौरसिया

रूस में 18 मार्च को राष्ट्रपति चुनाव की दौर में पुतिन का पलड़ा भारी नज़र आ रहा है। व्लादिमीर पुतिन चौथी बार इस पद की दौड़ में शामिल हुए हैं। उनके सामने 7 राजनीतिक दलों ने अपने अपने उम्मीदार मैदान में उतारे हैं। ओपिनियन पोल में भी पुतिन सबसे आगे है। पुतिन को 70 प्रतिशत वोट मिलने के आसार हैं।

पुतिन की वापसी से भारत पर असर:

रूस-चीन में बढ़ रही दोस्ती, अच्छे संकेत नहीं है। मौजूदा हालात में पुतिन का शक्तिशाली होना भारत के लिए सकारात्मक नहीं है। क्योंकि रूस और चीन साथ आ रहे हैं। दोनों का एजेंडा पश्चिम का विरोध है। वहीं रूस के पाक से संबंध मजबूत हुए हैं। वो तालिबानी आतंकियों का समर्थन कर रहा है और भारत की दोस्ती उन देशों से बढ़ी है, जो चीन के खिलाफ हैं।

दुनिया पर असर:

रूस व पश्चिमी देशों के बीच परेशानी बढ़ेगी| पुतिन के मजबूत होने से रूस और पश्चिम के बीच दिक्कत बढ़ेगी। वो और अधिक मजबूती के साथ वेस्ट का विरोध करेंगे। रूस खुद को अमरीका के समकक्ष रखना चाहता है। यही वजह है कि वो यूक्रेन से लेकर सीरिया तक अमरीका को हर जगह चुनौती दे रहा है। इसके अलावा ब्रिटेन से भी उसके रिश्ते काफी तनावपूर्ण हैं।

हालांकि दिनों-दिन रूस पर अमरीका और ब्रिटेन का शिकंजा कसता जा रहा है। ऐसे वक्त में जब रूस में राष्ट्रपति चुनाव जा चल रहे हैं, रूस के सामने कड़ी चुनौती है...दरअसल अमरीकी ट्रेजरी विभाग ने 19 रूसी नागरिकों और पांच संस्थानों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन संस्थानों में रूस की प्रमुख खुफिया एजेंसियां, फेडरल सिक्योरिटी एजेंसी और मेन इंटेलिजेंस डायरेक्टरेट (जीआरयू) शामिल है।

इसके अलावा देश की इंटरनेट रिसर्च एजेंसी पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। अमेरिका ने यह कार्रवाई 2016 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में रूसी हस्तक्षेप और साइबर अटैक की घटनाओं के लिए की है। वहीं ब्रिटेन में 4 मार्च को रूसी एजेंट सर्गेइ स्क्रिपाल और उनकी बेटी यूलिया को जहर दिए जाने का मामला सामने आया था जिसमे एक ब्रिटिश पुलिस भी अधिकारी गंभीर रूप से बीमार हो गया| इस घटना के बाद ब्रिटेन और रूस के रिश्ते करीब करीब शीतयुद्ध वाले दौर में चले गए हैं । इसी बीच ब्रिटेन की पुलिस ने दक्षिण पश्चिम लंदन में रूसी व्यापारी निकोलाई ग्लुसकोव की मौत की जांच हत्या की आशंका के साथ शुरू कर दी है।

68 वर्षीय ग्लुसकोव बीते 12 मार्च को अपने घर में मृत पाए गए थे, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनकी मौत का कारण गले में पड़ने वाले दबाव को बताया गया था। दोनों ही मामलों में अमरीका ने ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के साथ संयुक्त बयान जारी कर रूस पर इस घटना में शामिल होने का आरोप लगाया है।

ब्रिटेन ने रूसी जासूस की मौत के बाद रूस के 23 राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। ऐसे आरोप लगाए गए हैं कि हत्या के इस प्रयास के लिए रूस में निर्मित नर्व एजेंट का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही थेरेसा मे ने रूसी विदेश मंत्री के फीफा विश्व कप के लिए भेजे निमंत्रण को भी खारिज कर दिया, उन्होंने कहा कि इस साल के अंत में रूस में होने वाले फुटबॉल विश्वकप में शाही परिवार हिस्सा नहीं लेगा।

इस मामले में अमरीकी राजदूत निकी हैली ने भी ब्रिटेन का समर्थन किया है। हालांकि रूस किसी भी तरह की साजिश में शामिल होने से इनकार करता आया है। संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजनयिक वेस्ली नेबेनज़िया ने तमाम आरोपों को सिरे ख़ारिज करते हुए ब्रिटेन के आरोपों के समर्थन में पुख्ता सबूत पेश करने की मांग की है ।

ब्रिटेन और अमरीका की रूस से चल रही तनातनी के बीच भारत की भूमिका अहम होती जा रही हैं। राजनयिक और रक्षा समझौतों के मुद्दों पर जहां भारत रूस के साथ है, वहीं ब्रिटेन के साथ भी भारत के काफी अच्छे संबंध हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि भारत किसके पक्ष में अपनी सहमती जताता है। हालांकि भारत ने इस मुद्दे पर अब तक अपना पक्ष नहीं रखा हैं। भारत के अमरीका, ब्रिटेन और रूस तीनों ही देशों के साथ अच्छे संबंध हैं, ऐसे में यह देखना लजमी होगा कि भारत इस पूरे प्रकरण में अपनी भूमिका कैसे निभाता है और रूस की सत्ता में चुनाव के बाद क्या बदलाव आते हैं।

Story Loader