
डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी (AI Generated Image)
रूसी तेल खरीद को बहाना बनाकर अमेरिकी राष्ट्रपति रणनीतिक साझेदार होते हुए भी भारत से ' दुश्मनी जैसे व्यवहार' पर उतर आए हैं। ट्रंप ने बुधवार रात एक ऐसे विधेयक को समर्थन देते हुए सीनेट में रखने के लिए हरी झंडी दे दी, जिससे उन्हें रूस से तेल खरीदने वाले देशों (भारत, चीन, ब्राजील) पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। इस विधेयक को अगले सप्ताह सीनेट में मतदान के लिए रखा जा सकता है, जहां उसे 80 फीसदी सांसदों का समर्थन मिल सकता है। हालांकि ट्रंप के इस फैसले पर भारत सरकार ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है लेकिन यह खबर मिलने पर गुरुवार सुबह भारतीय शेयर बाजार गिर गया।
डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के चलते भारत पहले ही अपने सामान के निर्यात पर दुनिया में सबसे ज्यादा 50 फीसदी (25 फीसदी पारस्परिक व 25 फीसदी पेनल्टी टैरिफ) अमेरिकी टैरिफ झेल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विधेयक पारित होने के बाद ट्रंप ने भारत पर टैरिफ में बढ़ोतरी की तो निर्यात और रोजगार पर बड़ा असर हो सकता है। हालांकि अमरीका के ज्यादा टैरिफ के कारण भारत निर्यात के लिए विभिन्न देशों में वैकल्पिक बाजार तलाशने में काफी आगे बढ़ चुका है।
राष्ट्रपति ट्रंप इसी सप्ताह भारत पर और ज्यादा टैरिफ लगाने की धमकी दे चुके हैं। सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक्स पोस्ट में ट्रंप द्वारा विधेयक को मंजूरी देने की जानकारी देते हुए कहा कि इसके पारित होने से यूक्रेन युद्ध बंद नहीं कर रहे रूस को तेल बिक्री से होने वाली आय, यानी वॉर फंडिंग, रोकने में मदद मिलेगी और वह संघर्ष विराम करने को राजी होंगे।
रूस प्रतिबंध अधिनियम 2025, इसे ट्रंप के खास माने जाने वाले सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने गत चार जनवरी को पेश किया है।
रूस से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं पर व्यापक दंड लगाने का प्रस्ताव है। रूस से अमेरिका में आयातित वस्तुओं और सेवाओं पर कम से कम 500% टैरिफ का प्रस्ताव। उन देशों से आयातित वस्तुओं और सेवाओं पर 500 % टैरिफ लगाने का प्रावधान है जो जानबूझकर रूसी मूल के यूरेनियम और पेट्रोलियम उत्पादों का व्यापार कर रहे हैं।
वस्तुओं के अलावा सेवाओं पर टैरिफ का मतलब है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों से सेवाएं लेने वाली कंपनियों पर भी टैरिफ बढ़ाया जा सकता है, यानी इससे उन देशों के रोजगार पर असर पड़ सकता है।
नहीं, यह विधेयक अगले सप्ताह सीनेट में पेश किया जा सकता है।
नहीं, यह राष्ट्रपति को अधिकार मिलेगा कि वह इस सीमा तक टैरिफ लगा सकते हैं, राष्ट्रपति इसे लागू करने और टैरिफ की सीमा खुद तय करेंगे।
तो भारत के लिए अमरीका को निर्यात लगभग असंभव होगा, निर्यात के नए विकल्प खुलेंगे लेकिन कुछ समय के लिए भारत में रोजगार पर असर पड़ सकता है।
| माह | अमरीका से आयात (अरब डॉलर) | अमरीका को निर्यात (अरब डॉलर) |
|---|---|---|
| जुलाई | 4.55 | 8.01 |
| अगस्त | 4.74 | 6.86 |
| सितंबर | 3.98 | 5.46 |
| अक्टूबर | 4.46 | 6.31 |
| नवंबर | 5.25 | 6.98 |
(स्रोत: वस्तुओं की आयात-निर्यात राशि, अरब डॉलर में)
अमेरिका 500 फीसदी तक टैरिफ के अल्टीमेटम से बुधवार को सेंसेक्स-निफ्टी में चार महीने की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट आई। सेंसेक्स 780 अंक टूटकर 84,181 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी भी 1 फीसदी से ज्यादा लुढक़कर 25877 के स्तर पर बंद हुआ। इससे एक दिन में ही निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपए डूब गए। एक्सपोर्ट आधरित स्टॉक्स सबसे ज्यादा टूटे।
डोनाल्ड ट्रंप के ताजा रुख पर भारत ने आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन रूस से तेल खरीद पर वह समय-समय पर अमेरिका की मांग यह कहते हुए खारिज कर चुका है उसके निर्णय देश के राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा व उपभोक्ताओं की मांग पर निर्भर करते हैं।
नई दिल्ली स्थिति जेएनयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अमित सिंह ने कहा कि अमेरिका के 500% तक टैरिफ लगाने का असर तो पड़ेगा, लेकिन नुकसान उतना नहीं होगा, जितना वह सोच रहा है। इसकी वजह है कि 50% फीसदी टैरिफ लगाने के बाद भारत में टैरिफ समस्या से निपटने का मैकेनिज्म तैयार किया गया है। उधर, अमेरिका में कई वस्तुएं महंगी हो गई थी, जिससे लोगों में हाय-तौबा के बाद कुछ वस्तुओं पर उसे टैरिफ घटाना पड़ा था। भारत से चाहे मसाले ही अमेरिका जाए, लेकिन टैरिफ ज्यादा होने से वहां के होटल उद्योग पर असर दिखता है।
अमेरिका की नई धमकी पर भारत इसके लिए पहले से तैयारी कर रहा है। इसके हिसाब से नीतियां और इकोनॉमिक सेट अप तैयार किया गया है। इसके चलते नेगेटिव असर कम दिख सकता है। यदि पूरा 500% टैरिफ लगेगा तो वहां व्यापार संभव नहीं होगा। भारत ने अमेरिका जाने वाली वस्तुओं के लिए इनडायरेक्ट रास्ते बनाए हैं, जो अब काम आते दिख सकते हैं। इसके बावजूद अब हमें अपनी व्यवस्था को पुख्ता करना ही होगा।
Published on:
09 Jan 2026 02:06 am
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