अमेरिका में संघीय विभाग पर छाए संकट के बादल अब और गहरे हो गए हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कुछ ऐसा करने की अनुमति दे दी है जिससे संघीय शिक्षा विभाग में काम करने वाले करीब 1,400 कर्मचारियों का भविष्य अब संकट में है।
अमेरिका (United States Of America) के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को संघीय शिक्षा विभाग से करीब 1,400 कर्मचारियों की छंटनी की अनुमति दे दी है। यह फैसला उस निचली अदालत के आदेश को पलटता है, जिसने इस कदम को असंवैधानिक मानते हुए रोक लगाई थी। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट के 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले को दूरगामी प्रभाव वाला माना जा रहा है। विश्लेषकों का मत है कि सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों की छंटनी की छूट देकर ट्रंप की कटौती नीति पर मुहर लगा दी है। इससे अमेरिका में संघीय विभाग पर छाए संकट के बादल अब और गहरे हो गए हैं।
यह बात किसी से भी छिपी नहीं है कि ट्रंप, संघीय शिक्षा विभाग के खिलाफ हैं। उन्होंने मार्च में शिक्षा मंत्री लिंडा मैकमहन (Linda McMahon) को शिक्षा विभाग को बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे और अप्रैल में विभाग ने कर्मचारियों को पेड लीव पर भेज दिया था। निचली अदालत के आदेश से जून में इनकी छंटनी रुकी रही, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर से रोक हटा दी है। छंटनी के बाद विभाग का स्टाफ आधे से भी कम रह जाएगा।
अमेरिका में ट्रंप के आलोचक, ट्रंप प्रशासन पर अवैध रूप से संघीय शिक्षा विभाग को बंद करने का आरोप लगाते हुए चेता रहे हैं कि इससे छात्रों के नागरिक अधिकार, विशेष शिक्षा और छात्रवृत्ति जैसी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वैधानिक कर्तव्यों का पालन अभी भी किया जाएगा, लेकिन वो यह भी स्वीकारते हैं कि कई विवेकाधीन कार्यों को राज्यों पर छोड़ देना बेहतर होगा।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से ट्रंप प्रशासन को विवादास्पद 'कटौती नीति' को जारी रखने की अनुमति मिल गई है। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे कार्यपालिका को मनमाने तरीके से एजेंसियाँ और विभागों को खत्म करने की छूट मिल जाएगी। संघीय शिक्षा विभाग 1979 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा बनाया गया था। अमेरिकी संविधान के अनुसार केवल कांग्रेस ही किसी संघीय एजेंसी को बना या समाप्त कर सकती है। ट्रंप की नीति पर कोर्ट की मुहर संविधान को चुनौती मानी जा रही है।
कांग्रेस, अमेरिका में संघीय शिक्षा विभाग को सीमित करने या कर्मचारियों की छंटनी के फैसले को पलटने के लिए हस्तक्षेप कर सकती है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल में ऐसा होना नामुमकिन-सा लगता है। संसद हाउस पर रिपब्लिकंस का नियंत्रण है, और सीनेट में डेमोक्रेट्स का बहुमत काफी मामूली है। ऐसे में ट्रंप के फैसले को पलटना कांग्रेस के लिए भी काफी मुश्किल है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला अमेरिका में कार्यकारी शक्ति के व्यापक विस्तार को दर्शाता है। पिछले हफ्ते ही न्यायाधीशों ने ट्रंप को राज्य, वित्त मंत्रालय और आवास एवं शहरी विकास सहित कई अन्य विभागों में व्यापक कटौती करने की अनुमति दी थी। इस फैसले से कार्यपालिका को अन्य विभागों को भी कमजोर करने का रास्ता मिल सकता है। इससे स्पष्ट है कि कटौती नीति शिक्षा विभाग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य विभागों में भी देखने को मिल सकती है।
शिक्षा विभाग का मामला यह महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाने वाला है कि कोई राष्ट्रपति क्या बिना कांग्रेस की मंजूरी के, सिर्फ कर्मचारियों की छंटनी करके, किसी पूरी एजेंसी को दरकिनार कर सकता है? यदि इसका जवाब हां है, तो भविष्य के राष्ट्रपति, चाहे वो किसी भी पार्टी के हों, बिना कांग्रेस की मंजूरी केवल स्टाफ हटाकर किसी भी संघीय एजेंसी को निष्क्रिय, खोखला बना सकेंगे। इससे संघीय ढांचा अस्थिर हो सकता है।