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‘डिएगो गार्सिया को मत सौंपिए…’ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंग्लैंड को किया आगाह, ईरान को भी दी कड़ी चेतावनी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चागोस द्वीपसमूह को मॉरीशस को सौंपने की ब्रिटेन की योजना पर कड़ा विरोध जताया। डिएगो गार्सिया को लेकर इंग्लैंड को आगाह करते हुए ट्रंप ने ईरान को भी सख्त चेतावनी दी। जानें पूरा विवाद और इसके रणनीतिक मायने।

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Donald Trump and Keir Starmer

Donald Trump and Keir Starmer (File Photo - IANS)

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंग्लैंड की उस योजना की आलोचना की है, जिसके तहत चागोस द्वीपसमूह को मॉरीशस को सौंपकर एक अहम सैन्य अड्डे को लीज पर वापस लेने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने इंग्लैंड को आगाह करते हुए कहा, “डिएगो गार्सिया को मत सौंपिए। यह जमीन इंग्लैंड से नहीं छीनी जानी चाहिए। यदि ऐसा हुआ तो यह हमारे महान सहयोगी पर एक दाग होगा।”

ट्रंप की ताजा टिप्पणी अगले सप्ताह अमेरिका और मॉरीशस के बीच प्रस्तावित वार्ता से पहले आई है। बुधवार को ‘ट्रुथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा, “मैं यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से कहता रहा हूं कि देशों के मामले में लीज अच्छी नहीं होती, और वह 100 साल की लीज में प्रवेश कर बड़ी गलती कर रहे हैं…”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि डिएगो गार्सिया “हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित” है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री स्टार्मर उन संस्थाओं के दावों के चलते इस महत्वपूर्ण द्वीप पर नियंत्रण खो रहे हैं, जिनके बारे में पहले कभी सुना भी नहीं गया।”

ट्रंप की टिप्पणी के जवाब में इंग्लैंड के विदेश कार्यालय ने कहा कि चागोस द्वीपसमूह से जुड़ा यह समझौता ब्रिटेन और उसके प्रमुख सहयोगियों की सुरक्षा तथा ब्रिटिश नागरिकों की रक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विदेश कार्यालय ने कहा, “हमने जो समझौता किया है, वही इस महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे के दीर्घकालिक भविष्य की गारंटी देने का एकमात्र तरीका है।”

प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर पहले भी कह चुके हैं कि यह समझौता सैन्य अड्डे के निरंतर संचालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है, क्योंकि मॉरीशस पहले भी द्वीपों पर ब्रिटिश संप्रभुता की वैधता को चुनौती देता रहा है।

अमेरिका ने ईरान को दी चेतावनी

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी वार्ता का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “यदि ईरान समझौता करने से इनकार करता है, तो अमेरिका को डिएगो गार्सिया का उपयोग करना पड़ सकता है… ताकि एक अत्यंत अस्थिर और खतरनाक शासन द्वारा संभावित हमले को रोका जा सके।”

रिपब्लिकन राष्ट्रपति ट्रंप पहले भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं। अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों को संदेह है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में बढ़ रहा है, हालांकि तेहरान इस आरोप से लगातार इनकार करता रहा है।

क्या है चागोस द्वीपसमूह?

चागोस द्वीपसमूह को आधिकारिक रूप से ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र (ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी) कहा जाता है। ये द्वीप वर्ष 1814 से ब्रिटेन के नियंत्रण में हैं। वर्ष 1965 में ब्रिटेन ने इन द्वीपों को अलग प्रशासनिक इकाई बनाकर एक विदेशी क्षेत्र (ओवरसीज टेरिटरी) के रूप में स्थापित किया।

मॉरीशस का कहना है कि जब उसे 1968 में आजादी मिली, उससे पहले चागोस द्वीपसमूह को उससे अलग कर दिया गया था। मॉरीशस का आरोप है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ था और उस पर दबाव डालकर ये द्वीप उससे अलग किए गए। इसलिए वह लंबे समय से इन द्वीपों पर अपना अधिकार जताता रहा है।

इस द्वीपसमूह का सबसे बड़ा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप डिएगो गार्सिया है। 1960 के दशक के अंत में ब्रिटेन ने अमेरिका को यहां सैन्य अड्डा बनाने की अनुमति दी। इसके लिए हजारों स्थानीय निवासियों को जबरन उनके घरों से हटाया गया। हटाए गए लोगों में से कई को मॉरीशस और सेशेल्स में बसाया गया, जबकि कुछ बाद में ब्रिटेन जाकर बस गए।