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दोहोक में राष्ट्रपति नेचिरवान बारजानी के आवास पर ड्रोन हमला, इराक ने की कड़ी निंदा, जांच के आदेश

इराक के कुर्द क्षेत्र में राष्ट्रपति नेचिरवान बारजानी के दोहोक स्थित आवास पर ड्रोन हमला हुआ, जिसमें संपत्ति को नुकसान पहुंचा लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। प्रधानमंत्री अल-सुदानी ने घटना की निंदा करते हुए संयुक्त जांच के आदेश दिए, जबकि अस्थिरता को लेकर चिंता बढ़ी।

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भारत

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Anurag Animesh

Mar 29, 2026

Drone Attack on President Nechirvan Barzani

AI Image-ChatGpt

इराक के अर्द्धस्वायत्त उत्तरी कुर्द क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, जब क्षेत्रीय राष्ट्रपति नेचिरवान बारजानी के दोहोक स्थित आवास पर ड्रोन हमला हुआ। इस हमले में आवास की संपत्ति को नुकसान पहुंचा, हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई क्योंकि घटना के समय परिसर खाली था। अब तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, जिससे हमले के पीछे के मकसद और दोषियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

हमले की कड़ी निंदा की गई


इस घटना के बाद इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और बारजानी को फोन कर हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे एक जघन्य और अस्वीकार्य कृत्य बताते हुए कहा कि संघीय सरकार और कुर्द क्षेत्रीय प्रशासन मिलकर इसकी संयुक्त जांच करेंगे। इस सहयोगात्मक जांच का उद्देश्य हमले के पीछे जिम्मेदार तत्वों की पहचान करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है।

जानें डिटेल्स


वहीं, कुर्द क्षेत्र के उप प्रधानमंत्री कुबाद तालाबानी ने चेतावनी दी कि राज्य के नियंत्रण से बाहर कार्य कर रहे सशस्त्र गुट देश की स्थिरता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। उन्होंने ऐसे समूहों पर नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर दिया। इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गतिविधियां जारी हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार के प्रधानमंत्री मसरूर बारजानी से बातचीत कर वैश्विक बाजारों तक तेल आपूर्ति में सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। यह घटनाक्रम क्षेत्र की राजनीतिक और आर्थिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।

3,500 नाविक और मरीन तैनात


मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने हालात को और गंभीर बना दिया है। अमेरिकी नौसेना का विशाल जहाज USS Tripoli अब इस इलाके में पहुंच चुका है। यह कोई साधारण युद्धपोत नहीं है, बल्कि ऐसा प्लेटफॉर्म है जो समुद्र से लेकर हवा और जमीन तक एक साथ ऑपरेशन करने की क्षमता रखता है। इस जहाज पर करीब 3,500 नाविक और मरीन तैनात हैं। इसके साथ लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और भारी सैन्य उपकरण भी मौजूद हैं। आसान भाषा में कहें तो यह एक चलता-फिरता सैन्य बेस है, जो कहीं भी तेजी से कार्रवाई कर सकता है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि टकराव अब सीधे सैन्य स्तर तक पहुंच गया है। इसी बीच ईरान ने Strait of Hormuz को बंद करने की कोशिश की, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है।