
कांगो में इबोला का प्रकोप (File Photo)
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (Democratic Republic Of Congo / DR Congo) में इबोला (Ebola) वायरस चिंता का विषय बना हुआ है। देश में इस बीमारी के प्रकोप से मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इबोला का बंडीबुग्यो स्ट्रेन कांगो में फैल रहा है और एक्सपर्ट्स के अनुसार इस स्ट्रेन के लिए अब तक कोई वैक्सीन या विशिष्ट इलाज उपलब्ध नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 17 मई को इसे अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया था। इस वायरस की चपेट में हर उम्र वर्ग के लोग आ रहे हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।
कांगो में इबोला के मरीजों की संख्या 3,900 के करीब पहुंचने वाली है। बच्चों पर इस बीमारी के असर की बात करें, तो देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 743 बच्चों के इबोला वायरस से पीड़ित होने की पुष्टि हो चुकी है और 330 बच्चे इस बीमारी की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं। UNICEF ने भी इसकी पुष्टि की है। कुल मृतकों की संख्या की बात करें, तो कांगो में अब तक करीब 1,751 लोगों की इस बीमारी की वजह से मौत हो चुकी है।
इबोला के बंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए कोई वैक्सीन नहीं होने की वजह से इस बीमारी के इलाज में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार इस बीमारी से निपटने के प्रयासों में अन्य कई रुकावटें भी आ रही हैं, जैसे कि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग का कमजोर होना, पोस्टमार्टम टेस्टिंग को लेकर समुदाय का विरोध, स्टैंडर्ड इबोला ट्रीटमेंट सेंटर्स में क्षमता की कमी, संक्रमण से बचाव और नियंत्रण के सामान की कमी, और फंड की कमी। लैबोरेटरी की क्षमता पर भी दबाव बना हुआ है और इसी वजह से कई टेस्ट के नतीजे अभी भी पेंडिंग हैं।
ईबोला संक्रमण की शुरुआत में तेज़ बुखार, थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश और कमजोरी होती है। बाद में उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चकत्ते, आँखों का लाल होना, किडनी में परेशानी आना और मुंह, नाक, आंखों से खून आने जैसे लक्षण भी दिखने लगते हैं।
Updated on:
06 Aug 2026 11:38 pm
Published on:
06 Aug 2026 11:31 pm
