
भारत-चीन संबंध (फोटो - प्रतीकात्मक)
दुनिया की बदलती व्यवस्था और 'ट्रंप टैरिफ' के चलते भारत और चीन की पुरानी अदावत अच्छे पड़ोसी के संबंधों की ओर बढ़ती दिख रही है। दोनों देश 6 दशक पुराने बॉर्डर विवाद को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ने को सहमत हुए हैं जिसके लिए एक विशेषज्ञ समूह का गठन किया जाएगा। साथ ही भारत और चीन, व्यापार, आवाजाही और नागरिकाें के बीच संबंध बढ़ाने के कई कदमोंं के लिए भी राजी हुए। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसी माह के अंत में चीन दौरे से पहले चाइनीज़ विदेश मंत्री वांग यी के दो दिवसीय भारत दौरे के दौरान यह सहमति बनी। पीएम मोदी, एनएसए अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस.जयशंकर से चाइनीज़ विदेश मंत्री यी की मुलाकात के बाद विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों के बीच बनी सहमतियों की जानकारी दी।
भारत और चीन के बीच अन्य मुद्दों पर भी सहमति बनी। आइए नज़र डालते हैं उन सहमतियों पर।
भारत और चीन के बीच सीधी उड़ान जल्द फिर शुरू होंगी। इसके लिए हवाई सेवा समझौते को अपडेट किया जाएगा। वीज़ा प्रक्रिया को भी सरल बनाने पर सहमति बनी है।
2026 से कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने पर चीन ने सहमति दी है। यात्रा का दायरा भी बढ़ाया जाएगा।
दोनों देश, बॉर्डर पार बहने वाली नदियों के जल के बारे में आपातकालीन हालात में सूचना का आदान प्रदान करेंगे। विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र को सक्रिय रूप से काम करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पुराने जमाने के व्यापारिक सड़क मार्ग लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला को फिर से व्यापार के लिए खोला जाएगा। सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय और लघु व्यापार फिर से गति पकड़ेगा।
सीमावर्ती क्षेत्रों में मैत्रीपूर्ण तरीके से संवाद और सहयोग से शांति बनाए रखी जाएगी। टकराव की जगह अब बातचीत और विश्वास का माहौल बनाने की कोशिश होगी।
भारत और चीन, विश्व व्यापार संगठन के नेतृत्व में एक नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को बनाए रखना चाहते हैं, जो विकासशील देशों के हितों की रक्षा करे और बहुध्रुवीय विश्व को बढ़ावा दे।
भारत और चीन, ठोस उपायों के माध्यम से आपसी व्यापार और निवेश प्रवाह को सुगम बनाने पर भी सहमत हुए।
चीन, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी में भारत का समर्थन करेगा। वहीं भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2027 की मेजबानी में चीन का समर्थन करेगा।
चाइनीज़ विदेश मंत्री यी ने मंगलवार की शाम को पीएम मोदी से भी मुलाकात की। उन्होंने पीएम को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की 31 अगस्त से चीन में होने वाली बैठक के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तरफ से न्यौता दिया, जिसे पीएम मोदी ने स्वीकार किया। पीएम ने कहा कि वह जिनपिंग से मिलने के लिए उत्सुक हैं। मुलाकात में पीएम मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों के लिए बॉर्डर पर शांति के महत्व पर बल दिया तथा इस मुद्दे पर निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने पिछले साल रूस में जिनपिंग के साथ अपनी बैठक के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर और सकारात्मक प्रगति का स्वागत किया है। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि स्थिर और रचनात्मक द्विपक्षीय संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और समृद्धि में अहम योगदान देंगे।
'टैरिफ वॉर' में अमेरिका के लगातार कड़े होते रुख के बीच चीन ने रिश्तों में गर्माहट का सकारात्मक संकेत देते हुए तीन अहम वस्तुओं उर्वरक, दुर्लभ खनिज (रेयर अर्थ मैटेरियल) और सुरंग खोदने वाली मशीनों के भारत को निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक चीन ने इन वस्तुओं की आपूर्ति शुरू कर दी है। भारत दौरे पर आए यी ने जयशंकर को भरोसा दिलाया कि भारत की मांगें पूरी कर दी गई हैं। भारत भी चीन की कंपनियों के भारत में निवेश के दरवाजे खोल सकता है जो गलवान घाटी में हुए विवाद के बाद बंद कर दिए गए थे।
Published on:
20 Aug 2025 10:25 am
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