
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर। ( सांकेतिक फोटो: Incognito's Social Media)
How Pakistan Became Close to The US : इन दिनों अमेरिका और पाकिस्तान के बीच खूब बन रही है। यह सब तब हो रहा है, जब अमेरिका इस देश की हकीकत से वाकिफ है। पूरी दुनिया को पता है कि पाकिस्तान बरसों से आतंकवाद को पोषित करता रहा है,वहां सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो, कभी भारत के पंजाब तो कभी कश्मीर में आतंकवादियों की फंडिंग, ट्रेनिंग और अलगाववादियों को समर्थन देने और भारत में घुसपैठ करवाने और आतंकी मॉडयूल भारत पहुंचाने में भी पाकिस्तान पेश पेश रहा है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के पास इस बात के भी सुबूत हैं कि पठानकोट, पहलगाम, पुलवामा और मुंबई में आतंकी हमले पाकिस्तान ने ही करवाए थे। वह आतंककारियों को पाकिस्तान में शरण देने में भी अग्रणी रहा है। इनमें हाफिज सईद और ओसामा बिन लादेन के नाम प्रमुख रहे हैं। लादेन को तो खुद अमेरिका ने पाकिस्तान में मार गिराया था। ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि पाकिस्तान एक बार फिर अमेरिका का पसंदीदा और करीबी कैसे बन गया?
सामरिक विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी का मानना है कि अमेरिका की पाकिस्तान नीति में बदलाव बाइडन के शासनकाल में शुरू हुआ और ट्रंप के शासनकाल में इसमें तेजी आई। ऐसा लगता है कि वाशिंगटन ने पाकिस्तान को भारत के प्रतिसंतुलन के रूप में उपमहाद्वीप में एक ताकतवर देश के तौर पर फिर से अपना लिया है। इससे बाइडन के कार्यकाल में पाकिस्तान के लिए आईएमएफ से वित्तीय सहायता हासिल करने और उसके एफ-16 बेड़े का आधुनिकीकरण करने के फैसलों को समझने में मदद मिल सकती है, जिससे भारत के खिलाफ उसकी क्षमताएं बढ़ीं।
उनका मानना है कि बाइडन प्रशासन ने पाकिस्तानी सेना की ओर से 2022 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान को पद से हटाने पर भी सहमति जताई, जो अभी भी जेल में हैं। दूसरी ओर, ट्रंप ने सीमा पार आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान को भारतीय दबाव से बचाया, जिसके कारण भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। उन्होंने सिर्फ साढ़े तीन दिनों के अंदर ही शत्रुता को तेजी से समाप्त करने के लिए दबाव बनाया। तब से, उन्होंने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को वैधता प्रदान की है, जिससे सत्ता हथियाने की प्रक्रिया को सामान्य बनाने में मदद मिली, जिसमें फील्ड मार्शल के पद पर उनकी पदोन्नति और फिर पिछले नवंबर में उनका संवैधानिक तख्तापलट शामिल है।
ब्रह्म चेलानी का मानना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने पर लगातार ध्यान केंद्रित करते हुए, ट्रंप ने पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा है, जिसे इस्लामाबाद लंबे समय से "इस्लामिक बम" के रूप में प्रचारित करता रहा है, इससे पहले कि अल-क्यू खान परमाणु प्रसार कांड ने उसके परमाणु तस्करी नेटवर्क की सीमा को उजागर किया। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान में संघर्ष विराम करवाने में भी भूमिका निभाई थी।
वे मानते हैं कि ट्रंप ने मुनीर को अपना 'पसंदीदा फील्ड मार्शल] कहा था, उन्हें अमेरिकी-ईरान कूटनीति में एक सूत्रधार के रूप में इस्तेमाल किया, जबकि पिछले साल अमेरिकी धरती से मुनीर की चेतावनी पर चुप्पी साधे रहे: ]हम एक परमाणु राष्ट्र हैं। अगर हम पतन की ओर अग्रसर होंगे, तो हम आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएंगे।' ब्रह्म चेलानी का विचार है कि आज, वाशिंगटन की पाकिस्तान नीति तेजी से चीन की उस दीर्घकालिक रणनीति को प्रतिबिंबित करती प्रतीत होती है जिसमें पाकिस्तान को भारत के साथ बैलेंस करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
Updated on:
23 Jun 2026 12:53 pm
Published on:
23 Jun 2026 12:31 pm
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