
पाक PM शहबाज शरीफ। (फोटो-ANI)
Pakistan Economy: आतंकवाद को लेकर भारत एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठा सकता है। इसके लिए पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और उनसे जुड़े कार्यक्रमों के सार्वजनिक वीडियो तथा अन्य साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। भारत अक्टूबर में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक में ये वीडियो और अन्य सबूत पेश कर सकता है। इन साक्ष्यों के आधार पर भारत पाकिस्तान को एक बार फिर 'ग्रे लिस्ट' में शामिल किए जाने की मांग कर सकता है। उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' से हटा दिया गया था, जब वह FATF के सदस्यों को 34-सूत्रीय एक्शन प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर संतुष्ट करने में सफल रहा था।
FATF की ग्रे लिस्ट उन देशों की चेतावनी सूची है, जिनकी मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण रोकने संबंधी व्यवस्थाओं में खामियां पाई जाती हैं। इन देशों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है, ताकि वे अपनी कमियों को दूर कर सकें। इस सूची में शामिल देशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी आर्थिक और कूटनीतिक दबाव का सामना करना पड़ता है।
दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आतंकी गतिविधियों के लिए जिहादी संगठनों को संरक्षण देने के आरोपों के कारण पाकिस्तान लंबे समय से चर्चा में रहा है। ऐसे में भारत के किसी भी नए प्रयास का क्या असर होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। खासकर तब, जब इस्लामाबाद ने खुद को डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ जोड़ने और एक शांतिदूत के रूप में पेश करने का प्रयास किया है।
भारत FATF की ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान को फिर से शामिल कराने के लिए ऑपरेशन सिंदूर के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों को सबूत के तौर पर पेश कर सकता है। इन वीडियो में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों को मारे गए आतंकवादियों के अंतिम संस्कार में शामिल होते हुए देखा गया था।
इसके अलावा भारत ऐसे अन्य साक्ष्य भी पेश कर सकता है, जिनसे यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधि प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की सभाओं में शामिल होते रहे हैं। इन सबूतों को पेश करने का उद्देश्य पाकिस्तान को फिर से FATF की कड़ी निगरानी में लाना या उसे दोबारा ग्रे लिस्ट में शामिल कराना है।
यदि पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल होता है, तो इसका सबसे अधिक असर वहां की आम जनता पर पड़ेगा। लोगों को महंगाई, बेरोजगारी और बैंकिंग लेनदेन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। वैश्विक स्तर पर आर्थिक अलगाव बढ़ने से आम नागरिकों का जीवन और अधिक प्रभावित होगा।
ग्रे लिस्ट में शामिल होने पर पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (ADB) जैसे संस्थानों से ऋण प्राप्त करना कठिन हो सकता है। विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आने से पाकिस्तानी मुद्रा का मूल्य गिर सकता है, जिससे पेट्रोल-डीजल, खाद्य तेल, दवाइयों और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
इसके अलावा, ग्रे लिस्ट में शामिल देशों में विदेशी निवेशक और बहुराष्ट्रीय कंपनियां निवेश करने से बचती हैं। इससे उद्योगों के विस्तार पर असर पड़ता है और रोजगार के नए अवसर कम हो जाते हैं।
इतना ही नहीं, पाकिस्तानी बैंकों के साथ विदेशी बैंक लेनदेन करने में भी सतर्कता बरतते हैं। इसके कारण विदेशों से पाकिस्तान पैसे भेजने और मंगाने की प्रक्रिया महंगी और धीमी हो जाती है।
साथ ही, पाकिस्तानी पासपोर्ट धारकों को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर अधिक सुरक्षा जांच, वीजा संबंधी अतिरिक्त अड़चनों और विदेशों में नए बैंक खाते खोलने में भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
Updated on:
30 Jun 2026 09:28 am
Published on:
30 Jun 2026 09:28 am
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