
डोनाल्ड ट्रंप और निकलोस मादुरो (फोटो-IANS)
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के पूर्व प्रेस सचिव कर्नल डेव लापन ने वेनेजुएला में की गई हालिया सैन्य कार्रवाई को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर जमकर भड़ास निकाली है। कर्नल डेव लापन ने कहा कि ट्रंप के इस आदेश का आधार क्या था? इसका मकसद क्या था? इससे दुनिया पर क्या असर पड़ेगा? इसे लेकर अब भी तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि ट्रंप की इस कार्रवाई ने अमेरिकी साख पर बट्टा लगा दिया है। अमेरिका की विश्वसनीयता को उसके मित्र देशों व साझेदारों के सामने नुकसान हुआ है।
मीडिया को दिए साक्षात्कार में अमेरिकी मरीन कर्नल डेव लापन ने कहा कि कार्रवाई को कई दिन बीत गए हैं, लेकिन अभी तक वेनेजुएला अभियान से जुड़े अहम सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। जेव पहले पेंटागन के प्रेस सचिव रह चुके हैं। वह होमलैंड सिक्योरिटी विभाग में मीडिया संबंधों के डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी के तौर पर भी काम कर चुके हैं। लापन ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के बयान आपस में मेल नहीं नहीं खाते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया, "क्या यह किसी कथित ड्रग तस्कर की गिरफ्तारी के लिए किया गया ऑपरेशन था, या वेनेजुएला से तेल लेने की कोशिश थी, या फिर वहां की सरकार बदलने का इरादा था? इन सवालों पर सरकार की तरफ से कई अलग-अलग स्पष्टीकरण हैं, जिनमें से कई विरोधाभासी हैं। लापन ने कहा कि इस तरह की अस्पष्टता की वजह से न सिर्फ आम अमेरिकी नागरिकों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि असल में हुआ क्या और आगे क्या होने वाला है।
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान और इराक में भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों की गई थी, लेकिन दोनों मामलों में एक बड़ा अंतर था। अफगानिस्तान और इराक में युद्ध को आधिकारिक रूप से घोषित किया गया था और उन्हें कांग्रेस की मंजूरी मिली थी। लेकिन वेनेज़ुएला के मामले में ऐसा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि भले ही यह इराक या अफगानिस्तान जैसा बड़े पैमाने का ऑपरेशन नहीं था, लेकिन इसमें सैन्य बल और घातक सैन्य बल का इस्तेमाल हुआ था। दर्जनों लोग मारे गए और अमेरिकी सैनिक घायल हुए। कांग्रेस ने न तो इस ऑपरेशन को अधिकृत किया और न ही उसे पहले से इसकी जानकारी दी गई थी। ऑपरेशन खत्म होने तक उन्हें इसके बारे में जानकारी भी नहीं दी गई थी।
लापन ने इस ऑपरेशन की जानकारी देने के तरीके की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पहले पेंटागन की कोशिश रहती थी कि जल्द से जल्द साफ और सही जानकारी दी जाए। अक्सर सीनियर मिलिट्री लीडर रिपोर्टर्स को ब्रीफ करते थे। अब ऐसा नहीं हो रहा है। जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन ने पेंटागन के बजाय व्हाइट हाउस में रिपोर्टर्स को ब्रीफ किया, और पेंटागन की स्थायी प्रेस टीम को असल में खत्म कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि वेनेजुएला की यह कार्रवाई विदेशों में भी गलत संदेश भेजती है। इससे यूरोप और एशिया में मौजूद अमेरिका के मित्र और साझेदार देशों के बीच असमंजस पैदा होता है। उन्हें सोचना पड़ता है कि क्या संधियों का अब कोई मतलब भी रह गया है।लापन ने कहा कि इससे सीधे तौर पर अमेरिका की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है। साझेदार देशों को यह सवाल पूछना पड़ता है कि क्या अब अमेरिका पर भरोसा किया जा सकता है। और यह कहना बहुत दुख की बात है।
Published on:
07 Jan 2026 09:39 am
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