
फ्रांस में प्रदर्शन(फोटो-IANS)
France Protests: फ्रांस में महंगाई और स्कूलों के हालत को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पेरिस और कई अन्य बड़े शहरों में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़, लूटपाट और सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़प हुई। उपद्रवियों ने कई सार्वजनिक और ऐतिहासिक इमारतों में आग लगा दी और दुकानों में लूटपाट की। इस पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांगें रखने वाले नागरिकों और तोड़फोड़-लूटपाट करने वाले अपराधियों में स्पष्ट फर्क है और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले उपद्रवियों से सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।
लिमोज शहर में हुई हिंसा के दौरान, उपद्रवियों ने जानबूझकर 19वीं सदी की ऐतिहासिक सिटी हॉल इमारत में आग लगा दी। जिस वजह छत ढह गई और यह ऐतिहासिक इमारत लगभग पूरी तरह से नष्ट हो गई। हाउते-विएन के प्रीफेक्ट मौरिस बाराटे ने बताया कि जब इमारत में आग लगाई गई तब वहां कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और आम लोग मौजूद थे।
वहीं, राजधानी पेरिस में प्लेस डे ला रिपब्लिक और उसके आसपास के प्रमुख पर्यटन और व्यावसायिक इलाकों में टूटे हुए कांच, लूटी गई दुकानें और बिखरे हुए पत्थर वहां हुई तबाही की गवाही दे रहे थे। इसके अलावा, मार्सिले में प्रदर्शनकारी सिटी हॉल की लॉबी में घुस गए और एक पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया, जबकि ल्योन में एक टूरिस्ट ऑफिस में आग लगा दी गई।
समाचार एजेंसी AP के अनुसार फ्रांस में हुई हिंसा को लेकर पुलिस ने 2,400 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों का अनुमान है कि शनिवार के विरोध प्रदर्शनों में लगभग 5,50,000 लोग शामिल हुए, जबकि आयोजकों का दावा है कि यह संख्या 8,00,000 से ज्यादा थी।
इस आंदोलन को प्रमुख मजदूर यूनियनों, छात्र संगठनों और 2018 के चर्चित येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं का समर्थन प्राप्त था। सोशल मीडिया पर इमारतों में आग लगने और दुकानों में लूटपाट होने के वीडियो सामने आने के बाद कई यूजर्स ने कहा है कि फ्रांस संकट के कगार पर खड़ा है।
राष्ट्र को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि पूरा देश इस समय गहरे दुख, गुस्से और शर्मिंदगी के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बेलगाम और बर्बर हिंसा को किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। मैक्रों ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है या लूटपाट की है, उन्हें पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाएगा और सरकार दंगाइयों के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगी।
मैक्रों ने बताया कि उन्होंने गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज से सुरक्षा और खुफिया तंत्र में हुई चूक को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा है। इसके अलावा, स्थानीय अधिकारियों और प्रशासकों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि आवश्यक हो, तो सार्वजनिक इमारतों और व्यावसायिक केंद्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विरोध प्रदर्शनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाए।
Updated on:
19 Oct 2026 09:43 am
Published on:
19 Oct 2026 09:34 am
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