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झोलाछाप डॉक्टरों के कारण हेपेटाइटिस बीमारी में पाकिस्तान दुनिया में सबसे ऊपर, रिपोर्ट में दावा, इलाज की तलाश में लोग बीमारी लेकर लौट रहे

पाकिस्तान में हेपेटाइटिस सी और बी का गंभीर संकट बढ़ता जा रहा है। लापरवाह स्वास्थ्य व्यवस्था, झोलाछाप डॉक्टरों और असुरक्षित मेडिकल प्रथाओं के कारण लाखों लोग संक्रमित हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करोड़ों लोग बीमारी से जूझ रहे हैं जबकि अधिकांश को इसकी जानकारी भी नहीं है।

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भारत

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Anurag Animesh

Apr 22, 2026

HCV In Pakistan

HCV In Pakistan(AI Image-ChatGpt)

HCV In Pakistan: पाकिस्तान की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में सामने आई रिपोर्ट ने जो तस्वीर दिखाई है, वह बेहद चिंताजनक है। कहा जा रहा है कि देश में हेपेटाइटिस सी (HCV) के मरीजों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है, और इसकी बड़ी वजह लापरवाही और अनियंत्रित मेडिकल सिस्टम है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब 9.8 से 10 मिलियन लोग हेपेटाइटिस सी से संक्रमित हैं। अगर हेपेटाइटिस बी को भी जोड़ लिया जाए तो यह संख्या 13.8 से 15 मिलियन तक पहुंच जाती है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 25 से 30 प्रतिशत लोगों को ही अपनी बीमारी के बारे में पता है। यानी लाखों लोग बिना जाने इस खतरनाक बीमारी के साथ जी रहे हैं।

इस स्थिति के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण है झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान में 6 लाख से ज्यादा ऐसे लोग इलाज कर रहे हैं जो न तो ट्रेनिंग लिए हुए हैं और न ही उनके पास कोई लाइसेंस है। ये लोग सस्ते इलाज के नाम पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।

एक ही सिरिंज का बार-बार इस्तेमाल


अस्पतालों की हालत भी कुछ बेहतर नहीं है। कई जगहों पर एक ही सिरिंज का बार-बार इस्तेमाल, बिना जांच के खून चढ़ाना और उपकरणों की ठीक से सफाई न करना आम बात हो गई है। सोचिए, कोई व्यक्ति इलाज कराने अस्पताल जाता है और वहीं से एक नई गंभीर बीमारी लेकर वापस आता है। यह स्थिति किसी भी देश के लिए बेहद शर्मनाक है। हेपेटाइटिस सी एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है। इसके लक्षण कई सालों तक सामने नहीं आते। जब तक पता चलता है, तब तक लीवर काफी हद तक खराब हो चुका होता है। कई मामलों में यह लीवर फेल होने या कैंसर तक का कारण बन जाता है।

नियमित जांच करवाना आसान नहीं


रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान में आम लोगों के लिए नियमित जांच करवाना आसान नहीं है। इलाज महंगा है और सुविधाएं सीमित हैं। ऐसे में समय पर बीमारी का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। सरकार ने 2025 में हेपेटाइटिस को खत्म करने का लक्ष्य 2050 तक तय किया था। लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि योजनाएं अक्सर शुरू तो होती हैं, लेकिन उन्हें बीच में ही छोड़ दिया जाता है।

बच्चों में HIV फैल रहा


हाल ही में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया। पंजाब प्रांत के तौंसा इलाके के एक सरकारी अस्पताल में बच्चों में HIV फैलने का मामला उजागर हुआ। एक जांच में पता चला कि वहां साफ-सफाई और संक्रमण रोकने के नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा था। नर्सें कपड़ों के ऊपर से इंजेक्शन लगा रही थीं, गंदी सिरिंज दोबारा इस्तेमाल हो रही थीं और बिना प्रशिक्षित लोग बच्चों को इंजेक्शन दे रहे थे। इस लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच कम से कम 331 बच्चे HIV पॉजिटिव पाए गए। और दुख की बात यह है कि सरकार द्वारा कार्रवाई की घोषणा के बाद भी हालात में खास सुधार नहीं हुआ।