23 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

IAEA प्रमुख राफेल ग्राॉसी ने दी वार्निंग, कहा- ईरान का परमाणु कार्यक्रम टला जरूर पर दुनिया पर खतरा अभी भी बरकरार

IAEA प्रमुख राफेल ग्राॉसी ने दुनिया को ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वार्निंग दी है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध ने ईरान को परमाणु बम बनाने से पीछे धकेल दिया है, लेकिन...

2 min read
Google source verification
Rafael Grossi

रॉफेल ग्रॉसी (फोटो-IAEA)

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था ने कहा कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग में तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर खतरा अभी भी बरकरार है। IAEA ने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम टला जरूर है, लेकिन उनके पास इतनी क्षमता अभी भी मौजूद है कि वह दोबारा से अपना परमाणु कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं।

ईरान को परमाणु बम बनाने से काफी हद तक पीछे धकेला

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने सीबीएस न्यूज के कार्यक्रम 'फेस द नेशन विद मार्गरेट ब्रेनन' में इंटरव्यू के दौरान कहा कि युद्ध ने तेहरान को परमाणु बम बनाने से काफी हद तक पीछे धकेल दिया है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि संघर्ष खत्म होने के बाद भी हमें कई बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

ईरान का 60 फीसदी समृद्ध यूरेनियम दुनिया के लिए खतरा

उन्होंने ईरान के 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को एक बड़ी चिंता बताया। उन्होंने कहा कि वह भंडार काफी हद तक वहीं रहेगा, जहां वह अभी है, यानी मलबे के नीचे। उन्होंने कहा क‍ि कुछ बुनियादी ढांचा और उपकरण अभी भी काम करने की स्थिति में हो सकते हैं। यह हम तभी पता लगा पाएंगे, जब हमारे निरीक्षक वापस जाएंगे।

ईरान की तकनीकी क्षमता को सैन्य कार्रवाई से खत्म नहीं किया जा सकता

आईएईए प्रमुख ने जोर दिया कि तकनीकी क्षमता को सैन्य कार्रवाई के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता। जो आपने सीख लिया है, उसे भुलाया नहीं जा सकता और ईरान के पास अपने कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के लिए औद्योगिक और वैज्ञानिक आधार मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सेंट्रीफ्यूज तकनीक, जो यूरेनियम संवर्धन के लिए जरूरी है, फिर से बनाई जा सकती है। उनके अनुसार, ईरान के पास अब सबसे उन्नत, तेज और कुशल मशीनें हैं और वे उन्हें बनाना जानते हैं।

हमें फिर से बातचीत की मेज पर लौटना ही होगा

ग्रॉसी ने यह भी कहा कि एजेंसी के पास अभी भी कई अनसुलझे सवाल हैं। कई सवाल अनुत्तरित हैं, कई चिंताजनक तथ्य हैं। उन्होंने निरीक्षण और पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि अगर आपके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो हमें दिखाइए। उन्होंने आगे कहा कि आगे बढ़ने के लिए कूटनीति बेहद जरूरी होगी। हमें फिर से बातचीत की मेज पर लौटना होगा।

ग्रॉसी ने यह भी पुष्टि की कि युद्ध से पहले कूटनीतिक संपर्क हुए थे, लेकिन कोई समझौता नहीं हो पाया। चर्चा हुई थी, लेकिन कोई समझौता नहीं हुआ। मिलिट्री एक्शन के जरिए 60 प्रतिशत समृद्ध यूरेनियम को हटाने के प्रपोजल पर ग्रॉसी ने ऑपरेशनल चुनौतियों की चेतावनी दी। उन्‍होंने कहा क‍ि 60 प्रतिशत बहुत ज्यादा कंटैमिनेटेड यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड है, जिसे संभालना बहुत कठिन है।