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बांग्लादेश में 18 महीनों में 3,100 अल्पसंख्यकों पर हमले, सरकार ने संसद में दी जानकारी

संसद में सरकार ने बताया कि अगस्त 2024 से फरवरी 2026 के बीच बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर करीब 3,100 हमले हुए। घरों, संपत्तियों और पूजा स्थलों को निशाना बनाया गया। भारत ने बांग्लादेश सरकार से घटनाओं की जांच और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

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भारत

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Anurag Animesh

Mar 14, 2026

india bangladesh

Bangladesh News

India Bangladesh: भारत सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि बांग्लादेश में अगस्त 2024 से फरवरी 2026 के बीच हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ लगभग 3,100 हिंसक घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में अल्पसंख्यकों के घरों, व्यवसायों, संपत्तियों और पूजा स्थलों को निशाना बनाया गया। यह आंकड़े विभिन्न मानवाधिकार संगठनों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर बनाए गए हैं।

India Bangladesh: भारत सरकार लगातार नजर बनाए हुए है


राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने बताया कि भारत सरकार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि भारत ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है और इस मुद्दे को कई बार उच्च स्तर पर बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ उठाया गया है। भारत सरकार ने बांग्लादेश से अपेक्षा जताई है कि वह इन घटनाओं की निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित करे तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।

अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं चिंता का विषय- मानवाधिकार


सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी देश में वहां रहने वाले सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उस देश की सरकार की जिम्मेदारी होती है। बांग्लादेश के संदर्भ में भी अल्पसंख्यकों सहित सभी नागरिकों की सुरक्षा और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना बांग्लादेश सरकार का दायित्व है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर कूटनीतिक माध्यमों से इस विषय को उठाती रहती है। भारत ने बांग्लादेश के साथ अपने करीबी और मित्रतापूर्ण संबंधों के तहत यह उम्मीद भी जताई है कि वहां की सरकार अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी उपाय करेगी। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं चिंता का विषय हैं और इनके समाधान के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई तथा सामाजिक जागरूकता दोनों जरूरी हैं।