
एस. जयशंकर और अब्बास अराघची
अमेरिका (United States of America) और ईरान (Iran) के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। दोनों देशों के एक-दूसरे के ठिकानों पर हमलों की वजह से मिडिल ईस्ट में स्थिति गंभीर हो गई है। होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को भी बंद रखा गया है, जिसका असर कई देशों पर पड़ रहा है। इस जलमार्ग में जहाजों पर हमलों के मामले भी देखने को मिले हैं, जिनमें भारत (India) के नाविकों को भी निशाना बनाया गया है। ऐसे में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) से फोन पर बात की।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर अराघची के साथ हुए फोन कॉल के बारे में जानकारी दी। जयशंकर ने बताया, "आज ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत हुई। मैंने क्षेत्र में जारी तनाव और हमलों को लेकर अपनी गहरी चिंता जताई। फोन कॉल के दौरान मैंने जोर देकर कहा कि किसी भी हालत में कमर्शियल जहाजों और नाविकों पर हमले नहीं होने चाहिए। भारत किसी भी पक्ष द्वारा किए गए ऐसे किसी भी हमले की निंदा करता है। मुझे मौजूदा हालात और चल रही बातचीत के बारे में अराघची ने ईरान का नज़रिया बताया गया। भारत हमेशा बातचीत और कूटनीति का समर्थन करता है।"
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के दौरान भारतीय नाविकों की सुरक्षा और भलाई भारत के लिए एक गंभीर मानवीय और कूटनीतिक संकट बन गई है। यह स्थिति दुनिया के संघर्ष वाले इलाकों में कमर्शियल मर्चेंट शिपिंग को निशाना बनाकर किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी के कारण पैदा हुई है। भारत की तरफ से पहले भी भारतीय नाविकों पर हमलों की निंदा की गई है। हालांकि आईआरजीसी - इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC - Islamic Revolutionary Guard Corps) ने कई मौकों पर उन जहाजों को निशाना बनाया है, जिसमें जान-माल का नुकसान देखने को मिला है। आईआरजीसी के हमलों की वजह से होर्मुज स्ट्रेट में खतरे की स्थिति बनी हुई है। भारत ने शुरू से ही कूटनीति और बातचीत के ज़रिए दोनों देशों को इस विवाद को निपटाने की सलाह दी गौ।
Updated on:
01 Aug 2026 02:07 am
Published on:
01 Aug 2026 01:42 am
