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UNSC सीट के लिए भारत ने लॉन्च किया अभियान, जानिए क्यों है ज़रूरी

India's Campaign For UNSC Seat: भारत ने 2028-29 कार्यकाल के लिए यूएनएससी की सीट के लिए अपने अभियान की शुरुआत कर दी है। भारत के लिए यह सदस्यता क्यों ज़रूरी है? आइए जानते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Jul 16, 2026

UNSC meeting

यूएनएससी मीटिंग (File Photo)

भारत (India) ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद - यूएनएससी (United Nations Security Council - UNSC) में 2028-29 कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्य बनने का अभियान शुरू कर दिया है। इस विषय में विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने भारत के अभियान का नारा शांति (सिक्योरिंग होलिस्टिक एडवांसमेंट थ्रू नॉर्म्स ट्रस्ट इंटीग्रिटी) और #India4UNSC लॉन्च किया। भारत का तत्काल लक्ष्य जून 2027 में चुनाव जीतकर 2028-29 के लिए सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बनना है, लेकिन मुख्य उद्देश्य सुरक्षा परिषद में सुधार कर स्थायी सदस्यता प्राप्त करना है।

इस बार भारत और ताजिकिस्तान आमने-सामने

भारत ने सुरक्षा परिषद चुनाव से करीब एक साल पहले ही अपनी उम्मीदवारी घोषित कर दी है। एशिया-प्रशांत समूह के हिस्से में 2028-29 के लिए सिर्फ एक अस्थायी सीट है, जिसके लिए भारत और ताजिकिस्तान आमने-सामने होंगे। हाल के वर्षों में चुनावों में बड़े देशों की भी हार हुई है। जर्मनी जैसे प्रभावशाली देश का हाल ही में चुनाव में पुर्तगाल और ऑस्ट्रिया से हारना इसका उदाहरण है। भारत को कई देशों का समर्थन मिल चुका है। भारत यूएनएससी में अब तक 8 बार अस्थायी सदस्य रह चुका है।

यूएनएससी की सदस्यता क्यों है भारत के लिए ज़रूरी?

2028-29 कार्यकाल के लिए यूएनएससी की अस्थायी सदस्यता मिलने से भारत को दो वर्षों तक सुरक्षा परिषद की बैठकों में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिलेगा। आतंकवाद, शांति स्थापना, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, पाकिस्तान और अन्य अहम मुद्दों पर भारत अपनी आवाज़ रख सकेगा। यह स्थायी सदस्यता की दावेदारी को भी मज़बूत करेगी। यूएनएससी की स्थायी सदस्यता भारत को वैश्विक शक्ति के रूप में मान्यता दिलाएगी। वीटो पावर के साथ भारत अंतर्राष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और विवादों पर सीधा प्रभाव डाल सकेगा। यह सदस्यता भारत के हितों की रक्षा करेगी और आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और परमाणु अप्रसार जैसे मुद्दों पर भारत के पक्ष को मज़बूत करेगी। स्थायी सदस्यता से भारत वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा सकेगा, देश की राष्ट्रीय सुरक्षा मज़बूत होगी और 'विश्व गुरु' बनने की राह आसान होगी।

सदस्यता सिर्फ पांच देशों का अधिकार नहीं: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने हाल ही में इंडोनेशिया की संसद में यूएनएससी में सुधार को जरूरी बताया था। भारत का तर्क है कि अगर सिर्फ अस्थायी सीटें बढ़ाई गईं और स्थायी सदस्यों की संख्या नहीं बढ़ी तो असली शक्ति फिर भी पांच देशों के पास ही रहेगी। परिषद में पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस हैं, जिनके पास वीटो का अधिकार है, जबकि बाकी 10 सदस्य सिर्फ दो साल के लिए चुने जाते हैं। पीएम मोदी के अनुसार यूएनएससी की स्थायी सदस्यता सिर्फ पांच देशों का अधिकार नहीं है।

स्थायी सदस्यों से कम नहीं भारत का सहयोग

भारत अपनी दावेदारी के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में अपने योगदान का भी उल्लेख करता है। भारत अब तक करीब 3 लाख सैनिकों को लगभग 50 शांति मिशनों में भेज चुका है, जो दुनिया के सबसे बड़े योगदानों में से एक है। वर्तमान में भी भारत के 4,300 से ज़्यादा सैनिक 10 सक्रिय शांति अभियानों में तैनात हैं।

स्थायी सदस्यता में चीन सबसे बड़ा कांटा

भारत यूएनएससी का स्थायी सदस्य बनना चाहता है, लेकिन यह राह कठिन है। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन करना होगा। किसी भी संशोधन को पहले 193 सदस्य देशों में से कम से कम दो-तिहाई यानी 129 देशों का समर्थन चाहिए। पांचों स्थायी सदस्यों को भी इसे मंजूरी देनी होगी। अगर इनमें से एक भी देश मंजूरी नहीं देता तो संशोधन लागू नहीं हो सकता। भारत की राह में चीन सबसे बड़ा कांटा है।