15 जुलाई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यूके में टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया पर ‘नाइट कर्फ्यू’ की तैयारी

Night Curfew On Social Media: यूके में टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया पर 'नाइट कर्फ्यू' की तैयारी चल रही है। क्या है सरकार का प्लान? आइए जानते हैं।
2 min read
Google source verification

भारत

image

Tanay Mishra

Jul 16, 2026

Night curfew on social media

सोशल मीडिया पर 'नाइट कर्फ्यू' की तैयारी (Representational Photo)

यूके (UK) में सरकार ने टीनएजर्स को ऑनलाइन लत, साइबर ठगी और इंटरनेट से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए नए सुरक्षा उपायों की घोषणा की है। प्रस्ताव के तहत 16 और 17 साल के टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया (Social Media) ऐप्स पर रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू (Night Curfew) रहेगा। यह रोक स्वतः लागू होगी, लेकिन अनिवार्य नहीं होगी और यूज़र्स चाहें तो कुछ क्लिक में इसे हटा सकेंगे। यह कदम पिछले महीने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए टिकटॉक, स्नैपचैट, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और अन्य सोशल मीडिया ऐप्स पर घोषित प्रतिबंधों का विस्तार है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वीपीएन के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगेगी, भले ही उसके इस्तेमाल से आयु सत्यापन नियमों को दरकिनार किया जा सके।

ऑटोप्ले और लगातार फीड दिखाने वाले फीचर भी रहेंगे बंद

सोशल मीडिया ऐप्स पर एक वीडियो खत्म होते ही दूसरा वीडियो अपने-आप चलने (ऑटोप्ले) और लगातार पसंद के मुताबिक कंटेंट दिखाने वाली फीड जैसे फीचर डिफॉल्ट रूप से बंद रहेंगे। हालांकि यूज़र्स चाहें तो इन्हें भी चालू कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इससे टीनएजर्स को बेहतर नींद मिलेगी, पढ़ाई पर ध्यान बढ़ेगा और परिवार और दोस्तों के साथ ज़्यादा समय बिताने का मौका मिलेगा। सोशल मीडिया पर टीनएजर्स के ज़्यादा समय बिताने से उनके माता-पिता भी चिंतित हैं और उनकी चिंता को भी सरकार ने ध्यान में रखा है।

ट्रायल में मिले अच्छे नतीजे लेकिन सवाल भी

सरकार ने 18 साल से कम उम्र के टीनएजर्स के लिए एआई चैटबॉट्स से भी यूज़र्स के लिए नियमित ब्रेक लेने की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। ट्रायल में रात 9 बजे से सुबह 7 बजे तक टिकटॉक, स्नैपचैट, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और रेडिट पर रोक से नींद, पढ़ाई में एकाग्रता और तनाव में सुधार देखा गया। यूट्यूब, गूगल क्लासरूम, टीम्स, वॉट्सऐप और आइमैसेज का इस्तेमाल जारी रहा। हालांकि कुछ टीनएजर्स ने दोस्तों से कटाव और शुरुआती दिनों में चिड़चिड़ापन महसूस किया। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए अभियान चलाने वाली मॉली रोज फाउंडेशन ने कहा कि ये कदम पर्याप्त नहीं हैं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए सरकार को व्यापक और सख्त नीति लागू करनी चाहिए।