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भारतवंशी विवेक रामास्वामी अमरीकी राष्ट्रपति की उम्मीदवारी की दौड़ में दूसरे नंबर पर

भारतीयों के लिहाज से इस बार अमरीका की राजनीति खासी रोचक होने जा रही है। गुरुवार को जारी रिपब्लिकन प्राथमिक मतदाताओं के दो नए सर्वेक्षणों में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बड़े अंतर से पहले स्थान पर दिखाया गया है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि एक सर्वे में अब तक दूसरे स्थान पर अपनी जगह बना चुके रॉन डिसेंटिस अब तीसरे नंबर पर खिसक चुके हैं और भारतीय मूल के 37 वर्षीय उद्यमी विवेक रामास्वामी चौंकाते हुए दूसरे नंबर पर आ चुके हैं। यही नहीं, रामास्वामी का समर्थन एलन मस्क ने भी किया है।

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Indian Vivek Ramaswamy second in race for US presidential candidacy

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भारतीयों के लिहाज से इस बार अमरीका की राजनीति खासी रोचक होने जा रही है। गुरुवार को जारी रिपब्लिकन प्राथमिक मतदाताओं के दो नए सर्वेक्षणों में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बड़े अंतर से पहले स्थान पर दिखाया गया है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि एक सर्वे में अब तक दूसरे स्थान पर अपनी जगह बना चुके रॉन डिसेंटिस अब तीसरे नंबर पर खिसक चुके हैं और भारतीय मूल के 37 वर्षीय उद्यमी विवेक रामास्वामी चौंकाते हुए दूसरे नंबर पर आ चुके हैं। यहां तक कि दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क ने भी विवेक रामास्वामी की तारीफ करते हुए उन्हें बेहद होनहार और आशाजनक उम्मीदवार बताया है। वो भी तब महज ढाई महीने पहले ही रामास्वामी ने एलन मस्क की आलोचना की थी। एलन मस्क मई महीने के आखिर में चीन दौरे पर गए थे जहां उन्होंने चीन में अपने कारोबार के विस्तार की बात की थी।

बढ़ती लोकप्रियता ने चौंकाया
यह सब इसलिए भी चौंकाने वाला है कि सामान्यतया अमरीका में भारतीय डेमोक्रेटिक पार्टी को सपोर्ट करते आए हैं। लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि एक नहीं दो-दो भारतीय अमरीका में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की दौड़ में हैं। दोनों रिपब्लिकन पार्टी से हैं। विवेक रामास्वामी के अलावा भारतवंशी निक्की हेली भी दौड़ में हैं, लेकिन रामास्वामी जिस तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, वो अमरीका में चर्चा का विषय बना हुआ है। अमरीका की जानी-मानी बौद्धिक पत्रिका पोलटिको ने इस पर एक लेख लिखा है, जिसका शीर्षक है - चुनावी सर्वेक्षणों में रामास्वामी की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता का रहस्य।

डीसेंटिस को दूसरे नंबर पर धकेला
पोलटिको मैग्जीन ने रिपब्लिकन फर्म साइग्नल के एक वेब-पैनल सर्वेक्षण का उल्लेख किया है, जिसमें रामास्वामी को पहली बार डबल डिजिट में यानी 11 प्रतिशत लोगों का सर्मथन मिला। वे ट्रंप के मुख्य प्रतिस्पर्धी समझे जा रहे फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डिसेंटिस से 1 अंक आगे रहे। हालांकि कुछ सर्वेक्षणों में अभी भी डिसेंटिस, रामास्वामी पर बढ़त बनाए हुए हैं। लेकिन मैग्जीन ने ये भी लिखा है कि यह एक मात्र सर्वेक्षण नहीं है, जिसमें रामास्वामी को दो अंकों में समर्थन मिलता दिख रहा है। एक अन्य इमर्सन कॉलेज के सर्वेक्षण में भी डेसेंटिस और रामास्वामी 10-10 प्रतिशत के साथ बराबरी पर दिख रहे हैं। जबकि जून में रामास्वामी को महज 2 फीसदी लोग समर्थन कर रहे थे।

ट्रंप और डीसेंटिस के समर्थक घटे, रामास्वामी के बढ़े
फॉक्स के सर्वे में भी रामास्वामी को 11 फीसदी रिपब्लिकन समर्थन करते दिख रहे हैं, लेकिन इस सर्वे में डिसेंटिस को 16 प्रतिशत सर्मथन मिलता दिख रहा है। पर गौर करने की बात ये है कि डिसेंटिस को फरवरी में 28 फीसदी, जून में 22 फीसदी समर्थन मिल रहा था। जबकि रामास्वामी को जून में सिर्फ 5 फीसदी लोग सपोर्ट कर रहे थे। इस तरह रामास्वामी को समर्थन बढ़ रहा है जबकि डिसेंटिस पीछे का समर्थन घट रहा है। गौरतलब है कि रिपब्लिकन समर्थको में ट्रंप अब भी 53 फीसदी समर्थन के साथ सबसे आगे बने हुए हैं। पर ध्यान देने की बात ये है कि जून की तुलना में ट्रंप की लोकप्रियता में भी 3 फीसदी गिरावट आई है।

ट्रंप के समर्थक रामास्वामी हैं 52 अरब रुपए के मालिक
37 वर्षीय विवेक रामास्वामी, अमरीका में सबसे कम उम्र के रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं। उन्होंने पांच ऐसी दवाएं विकसित की हैं जिसको अमरीका दवा नियामक एफडीए से अप्रूवल मिल चुका है। रामास्वामी सोशल मीडिया पर खूब लोकप्रिय है। सर्वेक्षणों के अनुसार रामास्वामी को युवा रिपब्लिकन और कॉलेज डिग्री वाले मतदाता अधिक पसंद करते हैं। गौर करने की बात ये है कि रामास्वामी ने कई मौकों पर ट्रम्प का बचाव किया है। रामास्वामी ने कहा है कि ट्रम्प ने नए पैमाने तय किए हैं। ट्रंप ने भी रामास्वामी के खिलाफ अब तक कुछ नहीं कहा है। रामास्वामी ही ऐसे रिपब्लिकन उम्मीदवार हैं जिन्होंने कहा है कि अगर वे चुने जाते हैं तो वे ट्रम्प को माफ कर देंगे। ट्रम्प से बेहतर संबंधों की वजह से वे कई रिपब्लिकन के फेवरेट बनते जा रहे हैं। फोर्ब्स मैग्जीन के अनुसार, रामास्वामी 52 अरब संपत्ति के मालिक हैं।


रामास्वामी की प्रमुख किताबें
वोक, इंक्लेवः इनसाइड कॉरपोरेट अमरीका सोशल सिस्टम जस्टिम स्कैम
नेशन ऑफ विक्टिम्सः आइडेंटिटी पॉलिटिक्स, द डेथ ऑफ मेरिट एंड द पाथ बैक टू एक्सलेंस
कैपिटेलिस्ट पनिशमेंटः हाउ वॉल स्ट्रीट इज यूजिंग योर मनी टू क्रिएट ए कंट्री यू डिड नोट वोट फॉर

अमरीकी बनें- रामास्वामी के प्रमुख दावे, वादा

रामास्वामी खुद को एंटी वोक (जागृत लोगों के विरोधी) कहते हैं। अमरीका में वोक उनको कहा जाता है जो रेस, जेंडर और सेक्शुएल ओरियंटेशन आधारित राजनीति का समर्थन करते हैं। रामास्वामी न्यूयॉर्क टाइम्स को एक साक्षात्कार में कहा था कि उनका पहला काम राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश 11246 को निरस्त करना होगा। इसमें 1965 से संघीय के कामों में ठेके के लिए अश्वेत लोगों को प्राथमिकता देने की बात प्राथमिकता से कही गई है।

रामास्वामी का जाना माना कथन है कि, हम राष्ट्रीय पहचान के संकट से जूझ रहे हैं। वोक वामपंथी इस शून्यता का शिकार हो रहे हैं। वे आपको बताते हैं कि आपकी जाति, आपका ***** और आपका यौन रुझान यह तय करते हैं कि आप कौन हैं, आप क्या हासिल कर सकते हैं। यह मनोवैज्ञानिक गुलामी है, और इसने हमारे देश में डर की एक नई संस्कृति पैदा की है जिसने अमरीका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हमारी संस्कृति को पूरी तरह से बदल दिया है। हम अपने से बड़ी किसी चीज का हिस्सा बनना चाहते हैं, पर हम अमरीकी बनना नहीं चाहते।

रामास्वामी ने सुझाया यूक्रेन युद्ध का हल
रामास्वामी ने हाल में कहा है कि यूक्रेन युद्ध में हमारा जोर पुतिन के हारने पर नहीं, अमरीका के जीतने पर होना चाहिए। नाटो की से सदस्यता से यूक्रेन को इंकार कर दिया जाए और पुतिन को यूक्रेन के कुछ हिस्सों जैसे डोनबास आदि पर कब्जा दे दिया जाए। रामास्वामी ने कहा कि अमरीका के लिए ज्यादा जरूरी ये है कि चीन और रूस में हो सैन्य सहयोग खत्म हो।