
अमेरिका-ईरान में वार्ता विफल रहने के बाद तनाव जारी है (Photo-IANS)
US-Iran War: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में समुद्री गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने अमेरिका की नाकेबंदी और बढ़ते तनाव को लेकर चीन और जापान के विदेश मंत्रियों से बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्होंने चेतावनी दी और इसे खतरनाक परिणामों वाला कदम बताया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका के प्रस्ताव की आलोचना भी की।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि ईरान के बंदरगाहों पर समुद्री नाकेबंदी कर दी गई है। अमेरिकी बलों ने फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियों को रोकने की क्षमता हासिल कर ली है। कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि शुरुआती घंटों में ही समुद्री मार्गों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया गया है, जिससे ईरान की ओर आने-जाने वाले व्यापार पर प्रभाव पड़ा है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ फोन पर बातचीत की, जिसमें क्षेत्रीय स्थिति पर विस्तार से चर्चा की और अमेरिका की नीतियों को तनाव बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। चीन ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन जताया। इसके बाद जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी से भी बातचीत हुई, जिसमें समुद्री सुरक्षा और आर्थिक प्रभावों पर विचार साझा किए गए।
पश्चिम एशिया में समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि किसी भी तरह की नाकेबंदी या सैन्य कार्रवाई से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है। जापान सहित कई देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और समाधान की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियां इस बात का संकेत देती हैं कि तनाव को कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रह सके और किसी बड़े टकराव से बचा जा सके।
Updated on:
16 Apr 2026 01:09 pm
Published on:
16 Apr 2026 12:51 pm
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