
फाइल फोटो- पत्रिका
Southern Iraq: मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच ऊर्जा क्षेत्र से एक अहम खबर आई है। इराक के बिजली मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ईरान ने दक्षिणी इराक क्षेत्र में गैस की आपूर्ति पूरी तरह से बंद कर दी है। इस अचानक उठाए गए कदम से इराक के पावर ग्रिड पर भारी दबाव आ गया है। इराक अपने कई प्रमुख बिजली संयंत्रों को चालू रखने के लिए मुख्य रूप से ईरानी गैस पर निर्भर करता है। गैस आपूर्ति रुकने से बिजली उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसका सीधा असर आम जनजीवन और औद्योगिक गतिविधियों पर पड़ना शुरू हो गया है।
इराक का ऊर्जा ढांचा दशकों से पड़ोसी देश ईरान से आयातित गैस के सहारे ही अपनी अधिकतम क्षमता पर काम करता रहा है। दक्षिणी इराक, जहां देश की अधिकतर आबादी और प्रमुख तेल क्षेत्र स्थित हैं, वहां बिजली की निरंतर आपूर्ति बहुत महत्वपूर्ण है। इराक के बिजली मंत्रालय ने बताया है कि आपूर्ति रुकने के कारणों का फिलहाल पूरी तरह से खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन वे ईरानी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।
ईरान के इस कदम पर इराक के बिजली मंत्रालय ने गहरी चिंता व्यक्त की है। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि गैस सप्लाई रुकने से सिस्टम से हजारों मेगावाट बिजली कम हो गई है। इसका सीधा असर दक्षिणी प्रांतों के नागरिकों पर पड़ेगा, जिन्हें अब लंबी बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में भी इस फैसले को लेकर नाराजगी और घबराहट देखी जा रही है, क्योंकि बिजली के बिना कारखानों का संचालन और जरूरी सेवाएं बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है। इराकी प्रशासन ने लोगों से ऊर्जा बचाने की अपील की है।
इराक सरकार अब इस संकट से उबरने के लिए आपातकालीन विकल्पों पर विचार कर रही है। बिजली मंत्रालय वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग करके पावर प्लांट्स को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहा है, हालांकि यह प्रक्रिया महंगी और जटिल है। इसके साथ ही, इराक के कूटनीतिक प्रतिनिधि ईरान के ऊर्जा मंत्रालय से संपर्क साधकर गैस आपूर्ति तुरंत बहाल करने की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देशों के बीच कोई नया समझौता होता है या फिर इराक को गैस के लिए किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय विकल्प की ओर रुख करना पड़ेगा।
इस पूरी घटना का एक बड़ा पहलू मध्य पूर्व में चल रहा मौजूदा सैन्य और कूटनीतिक संघर्ष है। जहां एक तरफ ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच सैन्य तनाव अपने चरम पर है, वहीं यह माना जा रहा है कि ईरान ने अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने या फिर क्षेत्रीय दबाव बनाने की रणनीति के तहत यह कदम उठाया हो। अक्सर युद्ध और तनाव की स्थिति में ऊर्जा संसाधनों का उपयोग एक रणनीतिक हथियार के रूप में किया जाता है। इस फैसले से यह भी स्पष्ट होता है कि इराक को अपनी ऊर्जा स्वतंत्रता हासिल करने के लिए अभी बहुत लंबा सफर तय करना है और अन्य देशों पर अत्यधिक निर्भरता उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।
Updated on:
04 Apr 2026 05:30 pm
Published on:
04 Apr 2026 05:29 pm
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