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युद्ध की भेंट चढ़ा मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा पुल, यूएस-इजरायल के हमले में हुआ तबाह

ईरान के अलबोर्ज में बने रहे B1 ब्रिज पर हमले ने मिडिल ईस्ट तनाव को और बढ़ा दिया है। गाजा युद्ध से शुरू हुआ संघर्ष अब इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच चुका है, जहां पुल, बिजली और आम लोगों की जिंदगी सीधे प्रभावित हो रही है।

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भारत

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Anurag Animesh

Apr 02, 2026

Iran Israel War

Iran Israel War(Image-'X'/@PressTV)

Iran Israel War: मिडिल ईस्ट एक बार फिर तनाव की आग में जल रहा है, और इस बार खबर ईरान के अलबोर्ज प्रांत से आई है। युद्ध के कारण भयानक तबाही हो रही है। ईरान के अलबोर्ज प्रांत के करज इलाके में बन रहा B1 ब्रिज, जिसे क्षेत्र का सबसे बड़ा पुल बताया जा रहा था, हमले की चपेट में आ गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला अमेरिका और इजरायल की तरफ से हुआ है। यह पुल लगभग बनकर तैयार था। करोड़ों डॉलर की लागत से तैयार हो रहा यह प्रोजेक्ट ईरान के लिए सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि एक बड़ी आर्थिक और रणनीतिक उपलब्धि माना जा रहा था। लेकिन एक ही हमले ने इसकी हालत खराब कर दी। इतना ही नहीं, हमले के बाद पूरे इलाके में बिजली भी चली गई, जिससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी ठहर सी गई।

मिडिल ईस्ट में लगातार तबाही


मिडिल ईस्ट लगातार युद्ध की जद में है। पिछले डेढ़ साल की तस्वीर देखें, तो मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अक्टूबर 2023 में हमास और इजरायल के बीच शुरू हुआ गाजा युद्ध अब सीमाओं से बाहर निकल चुका है। हिजबुल्लाह के साथ लेबनान में टकराव, हूती विद्रोही द्वारा लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाना, और सीधे ईरान-इजरायल के बीच मिसाइल हमले, ये सब इस बात के संकेत हैं कि संघर्ष अब व्यापक हो चुका है। ईरान इस पूरे समीकरण में एक अहम भूमिका निभा रहा है। माना जाता है कि वह हमास, हिजबुल्लाह और हूती समूहों का समर्थन करता रहा है। यही वजह है कि वह खुद भी अब सीधे निशाने पर है।

B1 ब्रिज की खासियत


B1 ब्रिज की बात करें तो यह करीब 1,050 मीटर लंबा था और इसकी संरचना काफी आधुनिक बताई जा रही थी। इस ब्रिज में ऊंचे खंभे, कई खंड और भारी निवेश हुआ था। लेकिन अब यह तबाह हो चुका है। ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी ने सोशल मीडिया पर इस हमले की जानकारी शेयर की। पोस्ट में साफ दिख रहा है कि निर्माणाधीन पुल को काफी नुकसान पहुंचा है। यह हमला एक बड़े ट्रेंड की ओर इशारा करता है। जिसे अब “इंफ्रास्ट्रक्चर वॉरफेयर” कहा जा रहा है। यानी दुश्मन देश की सेना को नहीं, बल्कि उसकी सड़कों, पुलों, बिजली व्यवस्था और जरूरी ढांचे को निशाना बनाना। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है।