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ईरान-इजरायल युद्ध के बीच PM मोदी ने कुवैत से की बात, जानिए क्या कहा?

ईरान-इजरायल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष की वजह से खाड़ी देशों में तनाव का माहौल है। इस संघर्ष के बीच पीएम मोदी ने फोन पर कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख अल-खालिद से बात की है। PM मोदी ने कुवैत के प्रिंस से क्या बात की, आइए जानते हैं...

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भारत

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Vinay Shakya

Mar 18, 2026

PM Modi Cabinet Decision,Jute Farmers, MSP Hike, Cabinet Approval

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। ( फोटो: ANI)

Iran–Israel War: PM नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख अल-खालिद से फोन पर बातचीत की और उन्हें ईद की शुभकामनाएं दीं। बातचीत के दौरान PM मोदी ने अमेरिका-इजरायल की संयुक्त सेनाओं और ईरान के बीच जारी संघर्ष में कुवैत पर हुए हमलों की निंदा की है। इसके साथ ही PM मोदी ने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर विचार-विमर्श किया और हाल के घटनाक्रमों पर चिंता जताई है।

PM मोदी ने फोन पर क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर कुवैत के प्रिंस से हुई बातचीत की जानकारी दी है। PM ने X पर बताया कि उन्होंने कुवैत के युवराज महामहिम 'शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह' से फोन पर बातचीत की है। बातचीत के दौरान PM ने कुवैत के प्रिंस को आगामी ईद के त्योहार की शुभकामनाएं दीं। PM मोदी ने बताया कि इस बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने हाल के घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त की। इस दौरान कुवैत की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता पर हमलों की कड़ी निंदा की है।

होर्मुट स्ट्रेट सुरक्षित करना भारत की प्राथमिकता

PM मोदी ने कुवैत के प्रिंस से हुई बातचीत में कहा कि भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता होर्मुज जलडमरूमध्य(होर्मुज स्ट्रेट) से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए निरंतर राजनयिक संवाद महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच इस दिशा में सक्रिय संवाद बनाए रखना आवश्यक है। PM ने कुवैत में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और सहयोग के के लिए कुवैत के प्रिंस का आभार जताया।

कितना जरूरी है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह विश्व के सबसे प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां से विश्व का 20% तेल-गैस का परिवहन होता है। युद्ध की वजह से इस मार्ग में बाधा आ रही है। इस मार्ग से तेलवाहक जहाजों का आवागमन बंद होता है तो वैश्विक स्तर पर इसका प्रभाव होता है। होर्मुज स्ट्रेट की चौड़ाई 33 किलोमीटर (21 मील) है, लेकिन जहाजों के आने-जाने के लिए उपलब्ध रास्ता और भी संकरा है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, जहाजों के लिए 2 मील का शिपिंग लेन आने के लिए और 2 मील का जाने के लिए सुरक्षित माना जाता है। जहाजों के बीच 2 मील का बफर जोन रखा जाता है, ताकि इनकी आपस में टक्कर न हो।

ईरान-इजराइल संघर्ष से वैश्विक बाजारों पर असर

ईरान-इजराइल संघर्ष की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली ईंधन की सप्लाई बाधित हुई है। इसका असर वैश्विक बाजारों पर दिख रहा है। होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक स्तर पर तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। सप्लाई बाधित होने से एशियाई देशों में तेल-गैस का संकट पैदा हो गया है। जंग शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है।