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मारे गए दर्जनों पाकिस्तान से घुसे आतंकवादी, ईरान ने सिस्तान बॉर्डर पर की कार्रवाई

ईरान ने पाकिस्तान सीमा से घुसपैठ कर रहे जैश अल-अदल आतंकियों को मार गिराया। सिस्तान-बलोचिस्तान के रास्क क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है, खासकर तब जब पाकिस्तान ईरान वार्ता की मेजबानी की तैयारी कर रहा था।

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भारत

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Anurag Animesh

Apr 22, 2026

Iran Neutralizes Terrorists

Iran Neutralizes Terrorists(AI Image-ChatGpt)

Iran Neutralizes Terrorists: ईरान और पाकिस्तान की सीमा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ईरान की सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान सीमा पार से घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे कई आतंकवादियों को मार गिराया है। ये कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब पाकिस्तान, ईरान के साथ बातचीत की मेजबानी की तैयारी कर रहा था। मामला ईरान के सिस्तान-बलोचिस्तान प्रांत के रास्क इलाके का है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ आतंकवादी पाकिस्तान की तरफ से सीमा पार करके इस इलाके में दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे। ईरानी सुरक्षा बल पहले से अलर्ट थे, और जैसे ही उन्हें इस मूवमेंट की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत ऑपरेशन शुरू कर दिया। इस दौरान कई आतंकी ढेर कर दिए गए।

जानें डिटेल्स


ईरान की सरकारी मीडिया ‘तसनीम’ ने भी इस ऑपरेशन की पुष्टि की है। खबरों के अनुसार, मारे गए आतंकवादी ‘जैश अल-अदल’ नाम के संगठन से जुड़े थे। ऑपरेशन के बाद सुरक्षा बलों ने उनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया है। हालांकि, इस कार्रवाई के बारे में ज्यादा आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। जैश अल-अदल कोई नया नाम नहीं है। यह एक बलूच सुन्नी उग्रवादी संगठन है, जो पिछले कई सालों से ईरान-पाकिस्तान सीमा के आसपास सक्रिय है। इसकी शुरुआत करीब 2012 में मानी जाती है। कहा जाता है कि यह पहले के एक आतंकी संगठन ‘जुंदल्लाह’ के कमजोर पड़ने के बाद उसी के सदस्यों से बना।

सिस्तान-बलोचिस्तान क्षेत्र में गतिविधियां देखी जाती हैं


ईरान का आरोप है कि यह संगठन उसके दक्षिण-पूर्वी इलाकों में अशांति फैलाने की कोशिश करता है और सुरक्षा बलों पर हमले करता रहता है। खासकर सिस्तान-बलोचिस्तान क्षेत्र में इसकी गतिविधियां ज्यादा देखी जाती हैं। रास्क इलाके में भी पहले कई बार इस संगठन और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हो चुकी है, जिनमें पिछले साल की घटनाएं भी शामिल हैं। दिलचस्प बात ये है कि जैश अल-अदल खुद को बलूच सुन्नी समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ने वाला संगठन बताता है। उसका कहना है कि वह इलाके में राजनीतिक और आर्थिक हकों की मांग कर रहा है। लेकिन ईरान समेत कई देश इसे सीधे तौर पर आतंकी संगठन मानते हैं।