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होर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर भारत को किस तरह होगा फायदा, अब कम होगी महंगाई?

होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को राहत मिली है। भारत को सस्ती ऊर्जा, कम शिपिंग लागत और बेहतर निर्यात का फायदा होगा।

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भारत

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Devika Chatraj

Apr 18, 2026

US Israel Iran War: ईरान ने एक बड़ा फैसला लेते हुए होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को व्यापारिक जहाजों के लिए फिर से खोलने का ऐलान किया है। तेहरान ने स्पष्ट किया कि लेबनान और इजरायल के बीच हुए सीजफायर के बाद यह कदम उठाया गया है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिल सके। इस फैसले का असर तुरंत देखने को मिला और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, ईरान ने यह भी साफ किया है कि यह छूट फिलहाल सीजफायर की अवधि तक ही सीमित है। अगर क्षेत्र में शांति बनी रहती है, तो इस फैसले को आगे भी जारी रखा जा सकता है।

भारत को कैसे मिलेगा फायदा?

तेल और गैस की कीमतों में कमी: खाड़ी देशों से भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अब आपूर्ति सामान्य होने से कच्चे तेल और LPG की कीमतों में गिरावट संभव है।
फंसे हुए जहाजों की वापसी: खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीय जहाज जल्द देश लौट सकेंगे।
शिपिंग लागत में कमी: व्यापारिक मार्ग खुलने से परिवहन लागत कम होगी, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्यों जरुरी है होर्मुज?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे जरुरी समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा संभालता है। फरवरी में तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने इस मार्ग पर नियंत्रण सख्त कर दिया था। जहाजों को चेतावनी दी गई और एक जहाज पर हमले के बाद आवाजाही लगभग पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में आ गई थी। इसका असर यह हुआ कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं। कई देशों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत तलाशने पड़े और शिपिंग कंपनियों की लागत बढ़ गई।

व्यापार और किसानों को मिलेगी राहत

होर्मुज के दोबारा खुलने से भारत के निर्यातकों को भी बड़ी राहत मिलेगी। खाड़ी देशों में सामान भेजने वाले व्यापारियों का काम फिर पटरी पर आएगा। महाराष्ट्र जैसे राज्यों के किसान, खासकर केला उत्पादक, बेहतर कीमत हासिल कर सकेंगे। सप्लाई चेन में सुधार से निर्यात बढ़ने की संभावना है।

अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई स्थिति

आपको बता दें कि यह फैसला राहत भरा है, लेकिन हालात अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब भी बना हुआ है। जहाजों के बीमा की लागत अभी भी ज्यादा है, कई देश अब भी इस मार्ग से जहाज भेजने में सावधानी बरत रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही होर्मुज पूरी क्षमता से काम करने लगे, लेकिन वैश्विक स्थिति को सामान्य होने में कम से कम 6 महीने का समय लग सकता है।