
अमेरिका-ईरान में बढ़ा तनाव। हमले का फोटो (सोर्स: ANI)
Middle East Conflict: दुनिया में तेल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसकी वजह ये है कि मिडिल ईस्ट में तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। सबसे पहले अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में IRGC के हेडक्वार्टर और उसके कई सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमला किया। इसके कुछ ही घंटों बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी कि IRGC ने दावा किया कि उसने बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है।
ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने अपनी जवाबी कार्रवाई को 'ऑपरेशन नसर 2' नाम दिया है। यह एक फारसी शब्द है, जिसका मतलब दुश्मन पर जीत या फतह हाशिल करना होता है।
'ऑपरेशन नसर 2' के तहत तेहरान का दावा है कि उसने बहरीन के शेख इस्सा एयरबेस स्थित अमेरिकी ड्रोन कमांड और कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाया। इसके अलावा हेलीकॉप्टर मेंटेनेंस फैसिलिटी और P-8 सैन्य विमान के हैंगर पर भी हमला करने का दावा किया है।
IRGC ने यह भी कहा कि बहरीन के अल जफेयर सैन्य ठिकाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। ईरानी मीडिया के अनुसार हथियारों के गोदाम, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेंटर और अमेरिकी सैनिकों के इस्तेमाल वाली इमारतों को निशाना बनाया गया।
ईरान ने चेतावनी दी है कि यह अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। अगर अमेरिका आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रखता है तो ऑपरेशन के नेक्स्ट स्टेज भी शुरू किए जा सकते हैं। हालांकि अमेरिका या बहरीन की ओर से इन हमलों में किसी तरह के नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है।
बता दें ईरान की कार्रवाई से पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दक्षिणी ईरान में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया था। CENTCOM के अनुसार यह ऑपरेशन करीब पांच घंटे तक चला।
इस दौरान बुशहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास जैसे रणनीतिक इलाकों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों की मदद से ईरान के कोस्टल डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन ठिकानों और नौसैनिक सेंटर को निशाना बनाया गया।
अमेरिका का कहना है कि इस अभियान का मकसद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। वॉशिंगटन का दावा है कि ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना जरूरी था ताकि समुद्री व्यापार प्रभावित न हो।
CENTCOM ने यह भी बताया कि मिडिल ईस्ट में 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक अभी भी तैनात हैं। सभी सैनिक हाई अलर्ट पर हैं। किसी भी नई चुनौती का जवाब देने के लिए तैयार हैं। ऐसे में दोनों देशों के दावों और जवाबी कार्रवाइयों ने पूरे मिडिल-ईस्ट में तनाव और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं संभले तो यह टकराव और व्यापक रूप ले सकता है।
Updated on:
14 Jul 2026 12:13 pm
Published on:
14 Jul 2026 12:13 pm
