28 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

इमरजेंसी मीटिंग में एक दूसरे से उलझ गए अमेरिकी-ईरानी अधिकारी, इस बात पर अचानक गर्म हो गया माहौल

न्यूयॉर्क में यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल की इमरजेंसी मीटिंग में अमेरिका और ईरान के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई। ईरान पर शनिवार को अमेरिका-इजराइल के बड़े एयरस्ट्राइक्स के बाद हुई मीटिंग में यूएस परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव माइक वाल्ट्ज ने कार्रवाई का बचाव किया।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Mukul Kumar

•

Updated: 1 Mar 2026, 11:55 AM IST

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद। (फोटो- ANI)

न्यूयॉर्क में यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल की इमरजेंसी मीटिंग में अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग छिड़ गई। इसमें दोनों देशों के परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव के बीच गरमागरम बहस हुई।

ईरान में शनिवार को अमेरिकी और इजराइल के बड़े एयरस्ट्राइक के बाद यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की इमरजेंसी मीटिंग हुई। मीटिंग में यूनाइटेड स्टेट्स की तरफ से एम्बेसडर माइक वाल्ट्ज ने इलाके में अपने देश की कार्रवाई का बचाव किया।

अमेरिकी दूत पर क्यों भड़के ईरानी अधिकारी

जैसे ही वाल्ट्ज 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' पर बोलने वाले थे, ईरान के एम्बेसडर आमिर सईद इरावानी ने वाल्ट्ज पर निशाना साधते हुए कहा- मैं अमेरिका के रिप्रेजेंटेटिव को सलाह देता हूं कि वे विनम्र रहें, यह आपके और आपके देश के लिए बेहतर होगा।

जिस पर वाल्ट्ज ने जवाब दिया- मैं उन्हें किसी और नाम से इज्जत नहीं देने वाला क्योंकि जो रिप्रेजेंटेटिव इस बॉडी में बैठा है, वह एक ऐसे शासन को रिप्रेजेंट करता है जिसने अपने ही हजारों लोगों को मार डाला है, सिर्फ इसलिए क्योंकि वह आपके अपने जुल्म से आजादी चाहते थे।

अमेरिकी दूत ने क्या कहा?

अमेरिकी एम्बेसडर ने मीटिंग में ईरान पर और निशाना साधा और कहा कि दुनिया का कोई भी जिम्मेदार देश तेहरान के इस इलाके में लगातार किए जा रहे लगातार हमले और हिंसा को नजरअंदाज नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा- इसकी वजह से अमेरिकियों की जानें गईं, लेबनान में सैकड़ों US मरीन मारे गए, इराक में हजारों सैनिक मारे गए। अमेरिकी दूत ने कहा- ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 'खास और स्ट्रेटेजिक' मकसदों के लिए था।

उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद उन मिसाइल क्षमताओं को खत्म करना था, जिनसे सहयोगी देशों को खतरा है। उन नेवल एसेट्स को कमजोर करना था, जिनका इस्तेमाल ईरान ने इंटरनेशनल पानी में अस्थिरता पैदा करने के लिए किया।

अमेरिकी दूत की बात पर ईरानी अधिकारी ने क्या दिया जवाब?

अमेरिकी दूत ने कहा कि ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार नहीं हो सकता और यह पॉलिटिक्स का मामला नहीं है बल्कि ग्लोबल सिक्योरिटी का मामला है।

मीटिंग में, ईरानी एम्बेसडर आमिर सईद इरावानी ने अमेरिका पर कई बड़े शहरों में आम लोगों की आबादी वाले इलाकों पर जानबूझकर हमला करने का आरोप लगाया।

उन्होंने जोर देकर कहा- यह सिर्फ हमला ही नहीं है, यह एक वॉर क्राइम और इंसानियत के खिलाफ क्राइम है। बता दें कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई इजराइली और अमेरिका के हमलों में मारे गए हैं।

इस बीच, अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान 40 दिनों का नेशनल शोक मना रहा है और पूरे देश में बड़े पैमाने पर दुख और विरोध प्रदर्शन की खबरें हैं।