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अमेरिकी नए आर्थिक प्रतिबंधों पर आया ईरान का बयान, कहा- ये उपनिवेशवाद की ओर लौटने का रास्ता

Ismail Baghai statement: अमेरिका के नए प्रतिबंधों पर ईरान का तीखा जवाब, कहा उपनिवेशवाद की ओर लौटने जैसा कदम। पेजेशकियान बोले, जंग अब खत्म होनी चाहिए, हम जीत चुके हैं।
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Iran US talks no deal speculation.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई। (Photo/X@IRIMFA_EN)

US economic sanctions on Iran: अमेरिका ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इस पर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध एकतरफा है। यह किसी भी एक देश के खिलाफ जारी गैरकानूनी आर्थिक युद्ध से कहीं ज्यादा बड़ा है।

बघाई ने कहा कि अमेरिका का यह फैसला संयुक्त राष्ट्र के नियमों के खिलाफ है। यह दुनिया के आजाद व संप्रभु मुल्कों पर अपनी सत्ता थोपने जैसा है। ईरान ने कहा कि कोई भी देश कानूनी तौर पर विदेशी बैंकों कंपनियों या हवाई अड्डों को जो अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आते हैं, किसी तीसरे देश के साथ कानूनी व्यापार छोड़ने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं।

सेकेंडरी प्रतिबंध का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई अधिकार नहीं

उन्होंने कहा कि ऐसे सेकेंडरी प्रतिबंध का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई अधिकार नहीं है। यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 2 (1) में बताई गई संप्रभु समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने कहा कि निकारागुआ मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस द्वारा तय किए गए हस्तक्षेप न करने के नियम को तोड़ते हैं। किसी आजाद देश को अपनी कानूनी नीतियों को बदलने के लिए मजबूर करने के मकसद से किया गया आर्थिक दबाव पूरी तरह से गलत है।

इस्माइल बघाई ने कहा कि नौसैनिक नाकाबंदी जो सैन्य हमले के बराबार हैं। उसके साथ यदि आर्थिक प्रतिबंधों को जोड़ दिया जाए तो यह UN-आधारित देशों के सिस्टम की नींव यानी संप्रभुता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। यह पुराने जमाने के उपनिवेशवाद की ओर लौटने का रास्ता बन जाएगा।

पेजेशकियान ने जंग खत्म करने की बात कही

उधर, ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से चली आ रही जंग को लेकर अब खुद तेहरान की तरफ से बड़ा बयान आया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने शुक्रवार को डॉक्टरों से बातचीत के दौरान कहा कि अब वक्त आ गया है जब इस जंग को खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि ईरान ताकत और सम्मान की स्थिति में खड़ा है। उनके मुताबिक पूरी दुनिया मानती है कि जीत ईरान की हुई है, जबकि अमेरिका ने नियमों को ताक पर रखकर ईरान के स्कूलों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे पर हमले किए हैं।

पेजेशकियान पर लगा रहे अमेरिका के आगे झुकने के आरोप

पेजेशकियान का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब जून में अमेरिका के साथ हुआ समझौता कुछ दिन पहले ही खत्म हो चुका है, और बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया। दरअसल संसद में मौजूद कट्टरपंथी नेता उनकी सरकार पर अमेरिका के आगे झुकने का आरोप लगा रहे हैं। इस पर राष्ट्रपति ने पलटवार करते हुए कहा कि इस समझौते में कोई ऐसी शर्त नहीं है जो ईरान के लिए घाटे का सौदा हो, बल्कि सारी जिम्मेदारियां दूसरे पक्ष यानी अमेरिका की तरफ से निभानी हैं।

ईरान की सेना रुख अब भी कड़ा

एक तरफ राष्ट्रपति शांति की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान की सेना का रुख अब भी बेहद कड़ा नजर आ रहा है। सेना प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने कहा कि जमीन, समुद्र, हवा और साइबर, हर मोर्चे पर ईरान की सेना दुश्मन के किसी भी नए हमले का करारा जवाब देने को तैयार है। वहीं रेवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख अहमद वाहिदी ने भी दावा किया कि ईरान ने अपने चारों तरफ एक मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार कर लिया है।