
फ़िलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायली सेना की कार्रवाई (फोटो- Gazanalysis एक्स पोस्ट)
Iran War: मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक तरफ सीरिया ने अपने पड़ोसी देश लेबनान को लेकर अपनी नई नीति साफ कर दी है, वहीं दूसरी ओर वेस्ट बैंक में इजरायली सेना की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने कहा है कि उनका देश लेबनान में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा। वहीं इजरायली सेना ने पिछले दो दिनों में 120 से ज्यादा फिलिस्तीनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने साफ कहा कि उनकी सरकार लेबनान में सैन्य हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि सीरिया मजबूत सरकारी संस्थाओं का समर्थन करता है और दोनों देशों के बीच संबंध कानून और आपसी सहयोग के आधार पर होने चाहिए। उनका कहना है कि पिछले कुछ महीनों से दमिश्क और बेरूत इसी दिशा में बातचीत कर रहे हैं। अल-शरा ने यह भी कहा कि लेबनान में किसी तरह की अस्थिरता का असर सीधे सीरिया पर पड़ेगा, इसलिए उनका देश शांति और स्थिरता चाहता है। उन्होंने संकेत दिया कि सीमा सुरक्षा, शरणार्थियों की वापसी और हथियारों तथा नशीले पदार्थों की तस्करी रोकना दोनों देशों की साझा जिम्मेदारी है।
अहमद अल-शरा के हालिया बयान को कई जानकार क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। हालांकि उन्होंने इजरायल के साथ किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि सीरिया अपने पड़ोसी देशों के साथ स्थिर और शांतिपूर्ण संबंध चाहता है। उनका जोर सैन्य टकराव के बजाय बातचीत और कानून के दायरे में संबंध मजबूत करने पर रहा। सीरियाई सरकार का कहना है कि उसने हाल के महीनों में ईरान समर्थित समूहों से जुड़े हथियारों की तस्करी रोकने के लिए भी कार्रवाई की है। इससे यह संकेत मिलता है कि सीरिया क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने और नए संघर्ष से बचने की नीति पर आगे बढ़ना चाहता है।
दूसरी ओर कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजरायली सेना ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो दिनों में 120 से ज्यादा फिलिस्तीनी नागरिकों को हिरासत में लिया गया। सबसे ज्यादा कार्रवाई नाबलुस, तुलकरम और हेब्रोन में हुई, जहां घरों पर छापे मारे गए, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और कई लोगों से पूछताछ की गई। कुछ जगहों पर इजरायली बसने वाले भी सेना की सुरक्षा में पहुंचे और उन्होंने मस्जिदों तथा इमारतों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। फिलिस्तीनी संगठनों ने इसे सामूहिक सजा की नीति बताते हुए संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से हस्तक्षेप की मांग की है। इन घटनाओं के बाद पूरे वेस्ट बैंक में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इन घटनाओं की आलोचना करते हुए नागरिकों की सुरक्षा की अपील की है। समीदौन ने इन कार्रवाइयों को सामूहिक सजा की नीति बताया है और कहा है कि आम फिलिस्तीनी नागरिक लगातार दबाव का सामना कर रहे हैं। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र (UN), अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस (ICRC) और मानवाधिकार संगठनों से वेस्ट बैंक में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए तुरंत कदम उठाने की अपील की है। इस बीच पूरे इलाके में सैन्य अभियान, गिरफ्तारियां और घरों पर छापेमारी जारी है, जिससे स्थानीय लोगों के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव के बीच वेस्ट बैंक की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।
Updated on:
27 Jul 2026 11:41 am
Published on:
27 Jul 2026 10:58 am
