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Iran War: ट्रंप की पसंद का होगा ईरान का अगला लीडर? अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिया बड़ा बयान

ईरान के अगले सुप्रीम लीडर को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने कहा कि खामेनेई के बेटे मोजतबा को वह स्वीकार नहीं करेंगे और नए नेता के चयन में उनकी भूमिका होनी चाहिए। खामेनेई की मौत के बाद ईरान में नए नेतृत्व को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

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भारत

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Anurag Animesh

Mar 06, 2026

Donald Trump

Donald Trump

Iran Israel War: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप(Donald Trump) ने ईरान के अगले सुप्रीम लीडर को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को अगला सुप्रीम लीडर बनाया जाता है, तो यह उन्हें मंजूर नहीं होगा। ट्रंप का कहना है कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता के चयन में उनकी भी भूमिका होनी चाहिए। अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान को ऐसा नेता चाहिए जो देश में स्थिरता और शांति ला सके। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “खामेनेई का बेटा मुझे मंजूर नहीं है। हमें ऐसा व्यक्ति चाहिए जो टकराव की जगह संवाद को बढ़ावा दे।”

Donald Trump ने वेनेजुएला का दिया उदाहरण


ट्रंप ने अपने बयान में वेनेजुएला का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जैसे वेनेजुएला में डेल्सी रोड्रिगेज के मामले में उनकी भूमिका रही थी, उसी तरह ईरान में भी नए नेता के चयन में उन्हें शामिल किया जाना चाहिए। दरअसल हाल ही में अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता "अयातुल्ला अली खामेनेई" की मौत हो गई थी। इस हमले में उनके बेटे "मोजतबा खामेनेई" बच गए। मोजतबा को ईरान की ताकतवर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का करीबी माना जाता है और वे लंबे समय से धार्मिक और राजनीतिक हलकों में प्रभावशाली माने जाते रहे हैं। इसी वजह से उन्हें अपने पिता का संभावित उत्तराधिकारी भी समझा जा रहा है।

Iran War: 37 साल बाद मिलेगा नया सुप्रीम लीडर


खामेनेई करीब 37 साल तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह केवल दूसरी बार है जब देश को नया सुप्रीम लीडर चुनना पड़ेगा। इसलिए ईरान की राजनीति इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है। बताया जा रहा है कि नए नेता के चयन को लेकर ईरान के भीतर भी मतभेद हैं। कुछ गुट ऐसे नेताओं को आगे लाना चाहते हैं जो पश्चिमी देशों के खिलाफ सख्त रुख रखते हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ सुधारवादी नेता ऐसे भी हैं जो अमेरिका और यूरोप के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने की बात कर रहे हैं।